सिमडेगा: सदर अस्पताल में नहीं था एंबुलेंस, 3 घंटे इंतजार कर नवजात ने तोड़ा दम

5 month infant dies simdega sadar hospital lack of ambulanceसिमडेगा: प्रदेश में बनाए गये सदर अस्पतालों की प्राथमिकता होती है गरीबों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना. लेकिन झारखण्ड में सदर अस्पताल लापरवाही का केंद्र और मरीजों की जान लेने का अड्डा बनते जा रहे हैं. आए दिन हॉस्पिटल में लापरवाही के कारण मासूम मरीज जिंदगी से हाथ धोते जा रहे हैं.

सिमडेगा के सदर अस्पताल में 5 महीने के नवजात ने अपनी जान गंवा दी क्योंकि अस्पताल में एंबुलेंस नहीं था. बच्चे के पिता उसे गोद में लेकर घूम रहे थे लेकिन उसे ले जाने के लिए गाड़ी नहीं थी. परिसर में एक एंबुलेंस खड़ी थी लेकिन उसमें पेट्रोल नहीं था. वहीं दूसरे एंबुलेंस का टायर पंचर हो गया था.




कुरकुरा निवासी देव महली का 5 महीने का बच्चा बीमार था. उसे सदर में एडमिट कराया गया था. सोमवार को उसकी हालत बिगड़ने पर सदर के डॉक्टरों ने उसे दूसरे हॉस्पिटल रेफर कर दिया. लेकिन वहां ले जाने के लिए परिजनों को एंबुलेंस नहीं मिली. तीन घंटे दौड़ने के बाद नवजात ने दम तोड़ दिया.

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बुरी बात ये थी कि नवजात को दूसरे हॉस्पिटल ले जाने के लिए अस्पताल में एंबुलेंस भले ही नहीं था. लेकिन जैसे ही बच्चे की मौत हुई, उसका शव ले जाने के लिए अस्पताल ने तुरंत एंबुलेंस मुहैया करवा दिया. इस बारे में बात करने पर अस्पताल के डॉक्टर्स ने कहा कि बच्चा बहुत बीमार था. उसके बचने की उम्मीद वैसे भी काफी कम थी.





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