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Gumla Jharkhand

 7 नाबालिग बच्चियों को गुमला बाल संरक्षण गृह भेजा गया, सभी के परिजनों की हो रही तलाश

बाल संरक्षण गृह

बाल संरक्षण गृहगुमला : गुमला अहतु थाना एवं गैर सरकारी संगठन एराउज  के द्वारा रांची स्थित प्रेमाश्रय से 7 नाबालिग बच्चियों को कल देर शाम गुमला लाया गया. जिसके बाद सभी बच्चियों को बाल संरक्षण गृह में रखा गया था. आज  सभी बच्चियों को बाल संरक्षण गृह के द्वारा सीडब्ल्यूसी गुमला के समक्ष प्रस्तुत किया गया.

सीडब्ल्यूसी में लायी गयी दो बच्चियों ने बताया कि वे रोजगार की तलाश में महानगरों की ओर जाने के लिए घर से निकली थी. लेकिन रेलवे स्टेशन पर ही हमें अकेले देखकर वहां पर मौजूद महिला पुलिसकर्मी के द्वारा हमलोगों से पूछताछ की गई और फिर हमें उनलोगों ने  प्रेमाश्रय बाल गृह के सुपुर्द कर दिया.

रेस्क्यू की गई  एक और बच्ची ने बताया कि उसकी मां पटना में रहती है, वहां खाना बनाने का काम करती है. मैं भी मां के कामों में हाथ बटाती थी, मगर एक दिन किसी बात को लेकर मेरी मां से झगड़ा हो गया था, जिसके बाद मैं पटना से गुमला अपने घर वापस आने के लिए निकल गई, लेकिन रास्ते में मुझे अकेला देखकर पुलिस ने प्रेमाश्रय बाल गृह में रख दिया. जिसके बाद आज मुझे गुमला लाया गया.

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राज्‍य में सबसे ज्‍यादा गुमला जिले की बच्चियां हो रही ट्रैफिकिंग की शिकार : रामेश्‍वरी उरांव

वहीं रेस्क्यू कर लायी गयी बच्चियों के संबंध में गुमला के महिला समाजसेवी रामेश्वरी उरांव का कहना है कि आज के दौर में पूरे झारखण्ड में सबसे ज्यादा गुमला जिला की बच्चियां ह्यूमन ट्रैफिकिंग की शिकार हो रही है. ऐसा कोई दिन नहीं है, जिस दिन सीडब्ल्यूसी में ह्यूमन ट्रैफिकिंग का मामला सामने न आता हो. इसके बावजूद गुमला जिला प्रशासन इस प्रकार के मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाती है. जबकि जिला समाज कल्याण विभाग के द्वारा ऐसे मामलों पर जन जागरुकता अभियान चलाया जाना चाहिए, मगर ये विभाग भी मौन धारण किये हुए है. जबकि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में न जाने कितने प्रकार की योजनाएं शुरू की है, जिसमें ग्रामीण बच्चों को हुनर सिखाया जाये, ताकि वे अपने घर पर ही रहकर रोजी-रोटी कमा सके, पर उसका अनुपालन नहीं हो रहा है.

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बच्चियों के परिजनों का पता लगाया जा रहा है

इधर इस मामले में सीडब्ल्यूसी के शम्भूनाथ सिंह का कहना है कि सात बच्चियों को उनके समक्ष प्रस्तुत किया गया है. मामले की पूरी तरह से छानबीन की जा रही है. सभी बच्चियों के परिवार वालों का पता लगाया जा रहा है. फ़िलहाल सभी को सुरक्षा के दृष्टिकोण से बाल संरक्षण गृह में ही रखा जाएगा. जैसे ही इनके परिजनों का पता चलेगा, इन्हें  उनके  सुपुर्द कर दिया जाएगा.   उनका कहना है कि अगर कोई परिजन सामने नहीं आते हैं तो ऐसे में सभी को पढ़ाने की व्‍यवस्‍था की जायेगी.

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