96 वर्षीय सेवानिवृत्त रेलकर्मी की आंखों से दो लोगों को मिलेगी नई रोशनी

सेवानिवृत्तबंगाली वेलफेयर सोसायटी के प्रयास से मरणोपरांत 16 लोगों की हो चुकी है नेत्रदान

धनबाद : 96 साल के सेवानिवृत्त रेलकर्मी हिरेंद्र चंद्र दास की आंखों से नेत्रबाधित दो लोग दुनिया देख सकेंगे. यह संभव हो पा रहा है बंगाली वेलफेयर सोसायटी के प्रयास से. जिसके कारण धीरे-धीरे लोग यह समझने लगे हैं कि मृत्युपरांत भी हम दो लोगों की जिंदगी में रोशनी और बहार ला सकते हैं.

धनबाद के चीरागोड़ा प्रोफेसर कॉलोनी स्थित रिटायर्ड रेलकर्मी 96 वर्षीय हिरेंद्र चंद्र दास के आवास मातम पसरा है, लेकिन घर के सदस्यों के चेहरों पर संतुष्टि देखी गयी. यही नहीं घर के आंगन में चिरनिद्रा में लेटे गृहस्वामी हिरेंद्र चंद्र दास के चेहरे से उनकी आंखें निकालती पीएमसीएच के विशेषज्ञों की टीम. यह सब संभव हुआ स्वर्गीय दास की सोच के कारण जिन्होंने मृत्यु पूर्व नेत्रदान करने की इच्छा जतायी थी. लगभग 96 साल की उम्र के बाद गुरुवार को उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली. मृत्युपरांत उनके परिजनों ने स्वर्गीय दास की अंतिम इच्छा को पूरा करने का निर्णय लिया और तुरंत नेत्रदान के लिए जागरुकता अभियान चलाने वाली संस्था बंगाली वेलफेयर सोसायटी के सदस्यों से संपर्क किया. सोसायटी के सदस्यों ने भी बगैर समय गंवाये इसकी सूचना पीएमसीएच के नेत्र विभाग को दी. थोड़ी देर में ही टीम उनके घर पहुंची और स्वर्गीय दास का कोर्निया निकाल सुरक्षित आई बैंक में जमा करा दिया, जहां से दो लोगों को फिर से रोशनी मिल सकेगी.

परिजनों ने जाहिर की संतुष्टि

नेत्रदान के उपरांत स्वर्गीय हिरेंद्र चंद्र दास के परिजनों ने संतुष्टि जाहिर की. परिजनों के अनुसार दास हमेशा सामाजिक कार्यों से जुड़े रहते थे और लोगों की भलाई के लिये हमेशा तत्पर रहते थे. इसी सोच के तहत उन्होंने अपनी आंखें दान कर दी थी, जिसके माध्यम से दो लोगों की दुनिया में फिर से बहार आ सकेगी.




वहीं पीएमसीएच से आयी आई बैंक की टीम ने न्यूज 11 से बात करते हुए कहा कि मृत्यु के बाद सूचना मिलने पर वे लोग तुरंत जाकर मृतक की कोर्निया को सुरक्षित निकाल रख लेती है, जो नेत्रबाधित दो लोगों को रोशनी दे सकती है.

बाइट : संजय कुमार, सहायक पीएमसीएच.

अब तक 16 लोगों की आंखें दान करवा चुकी है संस्था

नेत्रदान महादान से लोगों को अवगत कराने और जागरुकता फैलाने वाली संस्था बंगाली वेलफेयर सोसायटी इस दान के बाद अब तक 16 लोगों के मृत्युपरांत उनकी आंखों को दान करवा चुकी है. जिसके द्वारा 32 नेत्रबाधित लोग फिर से दुनिया देख पायेंगे. सोसायटी के सचिव ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि मृत्यु के बाद आपकी आंखें दो लोगों के जीवन में बहार ला सकती है, इसलिए उसे जलाने या दफनाने से पहले जरूर सोचे.

बहरहाल बंगाली वेलफेयर सोसायटी के प्रयास से स्वर्गीय हिरेंद्र चंद्र दास ने अपना जीना सार्थक कर लिया. उनकी तरह हमें भी इस पर जरूर विचार करना चाहिए ताकि हम अपनी मृत्यु के बाद भी अपनी आंखों के माध्यम से जिंदा रह पाये.





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