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रैन बसेरों के रंगदारों का आश्रयगृह पर कब्‍जा, निगम के राशि की हो रही बंदरबाट

रैन बसेरों के रंगदार

आयुष चौहान 

रांची : दीनदयाल अंत्योदय योजना राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत राजधानी रांची में एक निर्माणाधीन सहित कुल 11 आश्रय गृह चलाए जा रहे हैं, जिसका संचालन निगम एनजीओ के द्वारा कराती है. फिलहाल कुल 11 शेल्टर होम को चलाने का काम झारखंड इंफ्रास्ट्रक्चर कंसलटिंग प्राइवेट लिमिटेड कर रहा है. जिसको निगम प्रति शेल्टर होम के संचालन के लिए प्रतिमाह 40000 मुहैया कराती है. इसके बावजूद ना शेल्टर होम में पीने का पानी मौजूद है, ना शौचालय और ना ही किसी अन्य जरूरत की चीजें आलम यह है कि गरीबों को दिए जाने वाले सुविधाओं और नियमों को ताक पर रखकर अधिकारी एवं एनजीओ मुनाफा कमाने में जुटे हैं.

गत दिनों निगम को सभी शेल्टर होम के जीर्णोद्धार के लिए प्रति शेल्टर होम के एवज में ₹300000 दिए गए और निर्देश था कि सभी शेल्टर होम को सर्व सुविधा युक्त किया जाए. अभी तक निगम ने कुल तैंतीस लाख में से लगभग 22 लाख से भी अधिक खर्च कर दिए हैं, लेकिन मंजर वही का वही है.

यदि सारे शेल्टर होम में सबसे बुरा हाल कहे तो महिला आश्रय गृह का है, जो पहाड़ी के पीछे स्थित है. वहां की  स्थिति इतनी दयनीय है कि तस्वीरों को भी तरस आ जाए. महिला आश्रय गृह होने के बावजूद ना वहां शौचालय है और ना ही किसी अन्य मुलभूत सुविधा वहां नजर आती है. ऐसा ही हाल अन्य शेल्टर होम का है. कहीं गेट नहीं तो कहीं पानी नहीं तो कहीं ताला बंद. इसके बावजूद निगम के द्वारा लगातार एनजीओ को मोटी रकम देना अधिकारियों की कार्यशैली के साथ-साथ उनकी मनोदशा को भी जाहिर करती है. गरीब एवं असहाय के पैसे का बंदरबांट कर रहे लोगों ने तो व कई आश्रयगृह को अपने कब्जे में करके वहां किराए पर दे चुके हैं. आलम यह है कि लोग शाम में अपने घर की तरह दरवाजे को खोलते हैं और अहले सुबह ताला मारकर चले जाते हैं. जब हम इसकी पड़ताल करते-करते निगम तक पहुंचे तो निगम ने गोल मटोल जवाब देकर इस मामले को रफा-दफा करना चाहा, लेकिन निगम के लोगों ने बताया कि कई शेल्टर होम तो निगम जाने से कतराती है.

शेल्टर होम का निर्माण गरीब एवं असहाय की मदद एवं आगंतुकों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से निर्माण कराया गया है और उसे संचालित किया जा रहा है. लेकिन कुछ लोगों की वजह से यह एक व्यवसाय में तब्दील हो चुका है. जिसमें नुकसान गरीबों को हो रहा है और फायदा कुछ ही लोगों को. जरूरत है कि निगम एवं प्रशासन इस पर कड़ी कार्रवाई करते हुए एनजीओ सहित जिम्मेवार व्यक्ति पर कड़ी कार्रवाई करे.

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