Advani का जन्मदिन आज, जब नरेंद्र मोदी को लेकर अटल-आडवाणी में हुआ था विवाद

Advani birthday today Narendra-Modi Atal-Advani differences disputeनई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पार्टी के आधार स्तंभ माने जाने वाले नेता लाल कृष्ण आडवाणी का जन्मदिन है. वह आज 91 साल के हो गए हैं. जानकारी है कि वह आज नेत्रहीन बच्चों के साथ अपना जन्मदिन मनाएंगे. उनके जन्मदिन के मौके पर प्रधानमंत्री ने भी उन्हें ट्वीट कर जन्मदिन की बधाई दी. साथ ही कई अन्य नेताओं ने भी उनके घर जाका उन्हें जन्मदिन की बधाई दी है. झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी उन्हें ट्वीट कर बधाई दी है. आडवाणी का भारतीय जनता पार्टी को भारतीय राजनीति में एक प्रमुख पार्टी बनाने में सर्वोपरि योगदान रहा है. वह कई बार भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुके हैं. जब भी बीजेपी के इतिहास की बात होगी टी वह देश के पूर्व उप-प्रधानमंत्री लाल-कृष्ण आडवाणी की चर्चा के बिना अधूरी ही रहेगी.




लाल कृष्ण आडवाणी का जन्म पाकिस्तान के कराची शहर में एक हिन्दू सिंधी परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम कृष्णचंद आडवाणी और मां का नाम ग्यानी देवी था. उनकी प्रारंभिक शिक्षा कराची में हुई, लेकिन विभाजन के बाद उनका परिवार मुंबई में आकर बस गए. यहां के लॉ कॉलेज से उन्होंने स्नातक की डिग्री ली. आडवाणी ने कमला आडवाणी से 1965 में शादी की थी और इनके दो बच्चे हैं जयंत आडवाणी और प्रतिभा आडवाणी.

आडवाणी ने वर्ष 1941 में मात्र 14 साल की उम्र में संघ को प्रचारक के रूप में ज्वाइन किया. संघ ने आजादी के बाद सांप्रदायिक हिंसा झेल चुके राजस्थान के अलवर में उन्हें काम करने के लिए भेजा. वहां उन्होंने 1952 तक काम किया. उसके बाद 1951 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने आरएसएस के साथ मिलकर राजनीतिक पार्टी भारतीय जनसंघ की स्थापना की, उसमें आडवाणी सदस्य बने. उसके बाद वह 1957 में दिल्ली आ गए और जल्द ही जनसंघ की दिल्ली इकाई के जनरल सेक्रेटरी और बाद में प्रेसिडेंट बने.

जब मोदी को लेकर अटल-आडवाणी में हुआ था मतभेद

आडवाणी जिस समय राजस्थान में संघ के लिए काम कर रहे थे उसी वक्त वह अटल बिहारी वाजपेयी से मिले और दोनों धीरे-धीरे करीब आ गए. 16 अगस्त को जब वाजपेयी का निधन हुआ तो आडवाणी ने श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए कहा था कि मेरा दोस्त नहीं रहा, 65 साल का साथ छूट गया. अटल आडवाणी की दोस्ती भारतीय राजनीति में एक मिसाल है, लेकिन गुजरात दंगे के कारण दोनों के बीच नरेंद्र मोदी को लेकर मतभेद हो गया. उस वक्त नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे. उस वक्त वाजपयी मोदी को सीएम पद से हटाना चाहते थे, लेकिन आडवाणी यह नहीं चाहते थे. आख़िरकार उनकी ही चली और मोदी पद पर बने रहे.





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