पत्थलगड़ी पुरानी परंपरा, अंग्रेजों के जमाने में दिखाई गई थी इसकी पहचान- अर्जुन मुंडा

arjun munda deoghar raajpaliwarदेवघर : पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा 29 जून को देवघर पहुंचे और सर्वप्रथम बाबा मंदिर में पूजा अर्चना की. जिसके बाद उन्होंने श्रम मंत्री राजपालिवार के आवास पर प्रेस वार्ता को संबोधित किया. अर्जुन मुंडा के श्रम मंत्री के आवास पर पहुंचते ही कार्यकर्ताओं ने उनका भव्य स्वागत किया.

प्रेस वार्ता के दौरान पत्रकारों के द्वारा झारखंड के खुंटी में पत्थलगड़ी के ज्वलंत मुद्दे को उठाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा से पूछा गया कि आदिवासी समाज में पत्थलगड़ी को लेकर काफी आक्रोश देखा जा रहा है, ऐसे में बीजेपी सरकार इस मामले को कैसे निपटेगी. तो उन्होंने कहा कि पत्थलगड़ी एक परंपरा का हिस्सा है, लेकिन पत्थलगड़ी के आड़ में यदि सरकार अगर मानती है कि गलत हो रहा है तो रोकने के कारगर उपाय क्या हो सकती हैं इस पर सरकार को विचार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि पत्थलगड़ी एक साक्षी सिस्टम है जैसे कि किसी की मृत्यु होती है तो साक्षी के रूप में किया जाता है. ताकि इसकी पहचान हो सके जिसके निशान के लिए किया जाता है. ठीक उसी प्रकार गांव को भी दर्शाने के लिए पत्थलगड़ी किया जाता है, लेकिन जिन बातों का उल्लेख समाचार पत्रों के माध्यम से हो रहा है. कहीं ना कहीं भ्रम की स्थिति है और इन सब चीजों को लेकर सरकार को एक तरफ रखकर देखना चाहिए. वहीं दूसरे तरफ में यदि कोई क्राइम का एक्टिविटी है तो उसको उस नजरिये से देखना चाहिए. दोनों को मिलाकर देखना मेरे झमझ से एक बहुत ही सूक्ष्म लकीर है जिसको बहुत ही पैनी नजर से देखने की जरूरत है.




दुबारा शुरू हुई जेवियर्स कॉलेज में नामांकन प्रक्रिया, ये रही लास्ट डेट

वहीं पत्रकारों द्वारा पथलगड़ी समर्थकों द्वारा पहले ही वार्ता कर मामले को सुलझाने की बात पूछी गयी तो उन्होंने कहा कि इन सब चीजों पर मैं कोई प्रतिक्रिया  नहीं देना चाहता हूं क्योंकि सरकार की अपनी प्राथमिकता है. अगर संगठन स्तर पर कोई विषय आता है तभी चर्चा करते हैं. उनसे पत्थलगड़ी के विकल्प के बारे में पूछा गया तो उन्होंने टाल-मटोल करते हुए इसे पुरानी परंपरा बताया जिसका इतिहास भी गवाह है. उन्होंने टाल-मटोल करने के बाद कहा की जब अंग्रेजों की हुकूमत थी और जब मुकदमा हुआ तब उन दिनों में ट्राइबल के ऐसे बहुत सारे मुकदमे हुए थे जिसमें कहा गया था कि आपके पास सबूत के तौर पर क्या है. उसी वक्त पत्थलगड़ी की पहचान दिखाई गई थी, जिसको लोगों ने माना था.

गिरिडीह : मिटता जा रहा है इरगा नदी का अस्तित्व





WhatsApp chat Live Chat