बोकारो : डॉक्टर की अमानवीय कृत्य, मकान मालिक भाई-बहन को बनाया बंधक

Bokaro inhuman act doctor Landlord brother sister made hostageबोकारो : कहा जाता है कि डॉक्टर भगवान का दूसरा रूप होते हैं. किसी की जिंदगी की खोई उम्मीद की लो आज के इस वैज्ञानिक युग में कोई फिर से जलाता है तो वह डाक्टर ही है. लेकिन, स्वार्थी जमाने में बहुत से ऐसे लोग भी हैं जो डॉक्टर को मिले भगवान के दर्जे को कलंकित करने से बाज नहीं आते. ऐसा ही चोंका देने वाला एक मामला इस्पात नगरी बोकारो से  सामने आ रही है.

शहर के जाने-माने और प्रतिष्ठित नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. डीके गुप्ता पर अमानवीय कृत्य करने का आरोप पड़ोस में रहने वाले लोगों ने लगाया है. अब तक हजारों-हजार लोगों की नेत्रज्योति प्रदान कर उन्हें दुनिया का दीदार कराने वाले डॉ. गुप्ता पर अपने ही मकान मालिक भाई-बहन की जिंदगी अंधेरा करने का आरोप लगा है.

बोकारो में पिछले 06 वर्षो से किरायेदार द्वारा मकान मालिक भाई-बहन को बंधक बनाने का मामला सामने आया है. यह मामला सिटी थाना इलाके के को-ऑपरेटिव कॉलोनी की है. दरअसल, सोमवार को  को-आपरेटिव कॉलोनी में प्लॉट संख्या 229 स्थित मकान से मकान मालिक दीपक और उसकी बड़ी बहन मंजुश्री घोष को बेहद दयनीय हालत में बरामद किया गया.

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मकान मालिक के भाई-बहन को बंधक बनाने कि खबर जैसे ही मोहल्लेवासियों को लगी आस-पड़ोस के लोग जुट गए और जब सभी उस घर में दाखिल हुए तो उस घर का दृष्य देखकर लोग दंग रह गये. मकान मालिक दोनों भाई-बहन अर्धनग्न अवस्था में दो अलग-अलग कमरो में बंद था. बहन को ऊपर वाले कमरे में रखा गया था तो भाई को निचेवाले कमरे में. दोनों के हाथ बंधे हुए पाये गये.

कई दिनों से नहीं  दिया गया था खाना

ऐसा लग रहा था कि कई दिनो से दोनों को खाना नहीं दिया गया था. जिसके कारण पूरा शरीर सुखकर पतला हो गया था. घर के कमरे से बदबू आ रहा था. मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों को छुड़ाया और बोकारो जेनरल अस्पताल में भर्ती कराया. जहां अभी दोनों का इलाज चल रहा है. दोनों को छुडाने में पडोसीयों को काफी मसक्कत करनी पड़ी और पिछले दो दिनों की मेहनत के बाद दोनों को मुक्त कराया जा सका.

बताया जा रहा है कि इस प्लाट में बोकारो के जानेमाने नेत्र विशेषज्ञ डॉ डीके गुप्ता का नेत्र क्लीनिक चलता था. साथ ही एक अन्य किरायेदार मंतोष कुमार थे. बोकारो के को-ऑपरेटिव में चलनेवाले नव ज्योती ऑप्टिकल और नवज्योती मेडीकल में ये दोनों किरायेदार थे. वह यहां 2001 से मकान किराए पर लिए हुए थे. मकान मालिक बहन 56 वर्षीय मंजुश्री धोष और 50 वर्षिय दिपक घोष के पिता के 1981 मे गुजर जाने के बाद दोनों अकेले घर में रहते थे. दोनों ने अपने प्लाट को किराए पर 2001 में लगाया था जिसमें मेडीकल की दूकान के साथ-साथ नेत्र पिशेषज्ञ की क्लीनिक और ओप्टिकल की दूकान चलती थी.

घटना तब सामने आया जब पडोसियों ने मकान मालिक दोनों भाई-बहन को पिछले कई महिनों से घर के बालकनी में नहीं देखा. वह अक्सर बालकनी में जाया करते थे. किरायेदार से पूछनेपर सभी खैरियत कि बात करते थे. यही बात पड़ोसियों को खटकने लगी. पड़ोसियों  ने जब जोरजबरदस्ती घर में प्रवेश किया तो दृष्य देखकर सभी दंग रह गए.

पडोसीयो ने कहा कि ये नेत्र क्लिीनिक डॉ डीके गुप्ता द्वारा चलाया जाता था और उसमे मंतोष कुमार ने भी अपना दूकान खोला हुआ था. को-ऑपरेटिव कॉलोनी के जिस प्लॉट संख्या 229 में भाई-बहन दयनीय हालत में बरामद किए गए, वहां के पड़ोसी संतोष पांडेय ने कहा कि डॉक्टर गुप्ता ने जुल्म की पराकाष्ठा पार की है. उन्होंने जब दोनों भाई-बहन की हालत के बारे में जानकारी लेनी चाही और मकान की चाबी मांगी तो उन्हें चाबी देने से साफ इनकार कर दिया गया. इसके बाद उन लोगों ने पुलिस को खबर दी. पुलिस ने अपने तरीके से ताला खुलवाकर दोनों भाई-बहन को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया.

अपने घर में ही पांच वर्षों से बंधक बनी थी मंजू

सुशील पांडेय ने  बताया कि डॉक्टर साहब ने मंजू श्री घोष को पिछले लगभग 5 वर्षों से उसी के मकान में बंधक के तौर पर बंद कर रखा था, जबकि उसके भाई दीपक को विगत 2 महीने से कैद करके रखा गया था. बहन जहां दयनीय स्थिति में पड़ी थी, वहीं भाई अपने टूटे हुए पैर के साथ और लाचार व असहाय हो बिछावन पर पड़ा था. उसके चारों तरफ मल और अन्य प्रकार की गंदगी ही गंदगी पड़ी थी. सुशील ने कहा कि लंबे समय से जब दोनों भाई-बहन को पड़ोसियों ने नहीं देखा था तो उनलोगों ने सामूहिक रूप से उनका हालचाल लेने की ठानी. हालांकि जब कभी डॉक्टर साहब को उन दोनों भाई-बहन के बारे में पूछा जाता था तो वह हमेशा ही उनकी स्थिति ठीक-ठाक होने की बात कह कर पल्ला झाड़ लिया करते थे, लेकिन सोमवार को पड़ोसियों ने साक्षात लोगों को देखने का विचार किया.  परन्तु इस कार्य में उन्हें विरोध का भी सामना करना पड़ा सुशील की माने तो उन लोगों के साथ मारपीट का भी प्रयास किया गया बाद में पुलिस के हस्तक्षेप से मामला शांत हो सका.

पुलिस को चार दिवारी फांदकर करना पड़ा प्रवेश

बंद आवास कि जांच करने के लिए पुलिस को घर कि चारदिवारी फांदकर घर के अंदर प्रवेश करना पड़ा. क्योकि रसोइया घर के सभी गेट को बंद करके दूबक कर घर के अंदर बैठा था. पुलिस के लाख प्रयास के बाद भी जब गेट नहीं खुला तो पुलिस को घर के अंदर गेट और दिवार फांदकर अंदर प्रवेश करना पड़ा. पुलिस मकान में बंधक बनाये गए कमरे की पूरी तरह से जांच पड़ताल कर रही है. साथ ही दूबक कर घर कं अंदर बैठे रसोईये से पुछताछ की जा रही है. घर के अंदर किरायेदार कोई नहीं था. सारे क्लिनिक और दवा दूकान बंद पाये गए. किरायेदार कहां गए पुलिस उसकी जांच में जुटी है.

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इस हाईप्रोफाईल मामले कि जांच पुलिस देर रात तक करती रही. मौके पर पहुंचे सिटी डीएसपी अजय कुमार ने पुरे मामले कि जांच पड़ताल करने के लिए बोकारो जेनरल अस्पताल पहुंचे. वह बोकारो के सिटी थाना क्षेत्र स्थित उस क्लीनिक में भी गए जहां मकान मालिक को बंधक बनाया गया था. लेकिन मकान के अंदर रसोईया को छोडकर कोई नहीं मिला। अब इस हाईप्रोफाईल मामले में पुलिस पूरी तरह से जांच में जुट गई है.

बोकारो के सिटी डीएसपी अजय कुमार ने कहा कि पुरे मामले को पुलिस खंगाल रही है. पुलिस छानबीन कर रही है कि आखिर इस तरह से घर के अंदर मकान मालिक भाई-बहन को कैद करके क्यों रखा गया. किरायेदारों की  इसके पिछे क्या मंशा थी. पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है. पुलिस दोषी पाए गए लोगों पर कार्रवाई करेगी.



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