‘रांची में नहीं पढ़ सकती तो जिंदा रह कर क्या फायदा’, कहकर खा लिया जहर

जहरसत्यव्रत किरण (सन्नी)

रांची : बेड़ो की एक छात्रा ने महज इसलिए जहर खा लिया क्योंकि वह रांची में पढ़ना चाहती थी. बेड़ो के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की होनहार छात्रा को पढ़ने की ललक ने उसे रिम्स पहुंचा दिया. उसके रांची में पढ़ने के सपने में उसकी गरीबी रोड़ा अटका रही थी.

क्या है मामला

बेड़ो प्रखंड के मुरतो गांव की रहने वाली 18 वर्षीय पुजा कुमारी के जन्म लेते ही उसकी मां की मृत्यु हो गई. जन्म के 13 दिन बाद बिन मां की बच्ची को उसकी मौसी अपने गर ले गई. मौसी-मौसा ने उसे अपने संतान की तरह पाल-पोस कर बड़ा किया. उसकी पढ़ाई के लिए कस्तूरबा गांधी स्कूल बेड़ो में उसका नामांकन कराया. बिटिया पढ़ने में भी काफी तेज निकली. पूजा अपनी स्नातक की पढ़ाई रांची में करना चाहती थी. मगर वह भूल गई थी कि गरीबी ने उसे अपने सपनों को पूरा करने का हक नहीं दिया. उसकी पढ़ने की तम्मना ने उसे रिम्स के मेडिसिन विभाग के आईसीयू में पहुचा दिया, जहां वह अपने तकदीर से लड़ रही है.




सगे पिता ने पढ़ने के लिए नहीं दिये पैसे

बता दें कि छात्रा पूजा के मौसा एक किसान हैं. उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह उसे बेड़ो से बाहर पढ़ा सकें. पूजा ने गलती बस इतनी कर दी कि उसने अपने सगे पिता से पढ़ने के लिए पैसों की मांग कर दी. पिता ने पढ़ाई के लिए पैसा न देकर अपना फोन ही बंद कर लिया. फोन के बंद होते ही उसे लगा कि अब तो भविष्य अंधकार में है. इसके बाद उसने जहर खाकर अपनी जान देने की सोच ली. पूजा के मौसा गणेश गुप्ता ने बताया कि उसकी जिद थी कि वो रांची में रहकर आगे की पढ़ाई करेगी. पूजा में कुछ बनने की तम्मना थी.

परिजनों को अब है मददगार का इंतजार

जानकारी के अनुसार कस्तूरबा गांधी की छात्रा पूजा ने रांची में होने वाले सरकारी कार्यक्रमों में मुख्यमंत्री और राजपाल के समक्ष कई कार्यक्रम प्रस्तुत किए हैं. अच्छा भाषण देने के लिए उसे कई बार सम्मानित भी किया गया है. रिम्स में भर्ती होने से पहले निजी अस्पताल में पूजा के परिजनों ने कर्ज लेकर उसके इलाज में एक लाख तीस हजार रुपये भी खर्च कर दिये. अब आर्थिक रुप से कमजोर परिजन पूजा के इलाज और पूजा अपने भविष्य के लिए किसी मददगार का इंतजार कर रहे हैं.





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