अपनी बहनों से दूर सीआरपीएफ जवानों की कलाईयों पर चक्रधरपुर की बहनों ने बांधी राखी

चक्रधरपुर (पश्चिमी सिंहभूम) : रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहनों के लिए सबसे खास माना जाता है. लेकिन जो भाई अपनी बहनों से इस त्योहार में दूर रहते हैं, उनके लिए ये त्योहार भावुक का क्षण बन जाता है. देश के वीर जवान भी ऐसे ही भाई हैं जो अपनी बहनों से दूर दूसरों की रक्षा में तैनात रहते हैं. चक्रधरपुर में ऐसे ही भाईयों की सुनी कलाईयों को राखी बांधने स्कूली बच्चियां पहुंची.

जवानों को मिला बहन का प्‍यार

सारंडा पोड़ाहाट जैसे बीहड़ जंगलों में नक्सलियों से लोहा लेने वाले सीआरपीएफ जवान के कैंप में आज जश्न का माहौल है. नजारा चक्रधरपुर सीआरपीएफ 60 बटालियन कैम्प का है. कैम्प में स्कूली बच्चियां और स्कूल की शिक्षिकाएं जवानों की सुनी कलाईयों को राखी से हराभरा कर रही हैं, और उन्हें बहन का प्यार दे रही है. अपने घर परिवार से हजारों किलोमीटर दूर आम लोगों की सुरक्षा में डटे जवान भी एक अनजान शहर में घर के जैसा प्यार पाकर भावुक और खुशी का अनुभव कर रहे हैं. आज सीआरपीएफ कैम्प में रक्षाबंधन की उमंग और तरंग है.

राखी करेगी वीर जवानों की रक्षा

सीआरपीएफ जवानों को राखी बंधने पहुंचे विभिन्न स्कूलों के शिक्षिकाएं और स्कूली बच्चियां गर्व का अनुभव कर रहे थे. उन्हें इस बात की ख़ुशी थी की देश के वीर जवानों को राखी बंधने का उन्हें अवसर मिला. वे चाहती हैं की देश के जवान जो उनकी रक्षा में कफ़न बांधे मैदान ए जंग में कूदते हैं उन वीर जवानों की रक्षा उनकी ये राखियाँ करेगी.

जवनों को दी सलामी

रक्षाबंधन त्योहार के दौरान गीत संगीत और कविता प्रस्तुति से माहौल में देशभक्ति का जोश भी भर आया. जहां स्कूली बच्चियों और शिक्षिकाओं ने गीत के माध्यम से जवानों को उनकी वीरता के लिए नमन किया, वहीं चक्रधरपुर रेल मंडल के कवी रणविजय कुमार ने अपनी रचनाओं से जवान के अदम्य साहस का बखान किया. तालियों से कैम्प गूंजता रहा. यही नहीं जवानों को सलामी देते हुए सैकड़ों स्कूली बच्चों ने रक्षाबंधन के दिन सीआरपीएफ जवानों के नाम पत्र भी लिखे और पत्र में कविता से उन्हें अपना प्यार दिया. इस प्यार को पाकर सीआरपीएफ जवान गदगद हो गए.

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प्रकृति को बचाने के लिए मनाएं रक्षाबंधन : कमांडेंट

सीआरपीएफ 60 बटालियन के कमान्डेंट पीसी गुप्ता ने कहा की रक्षाबंधन का त्योहार यही तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रकृति को बचाने के लिए भी एक रक्षाबंधन मानना चाहिए. उन्होंने अपील की कि‍ लोग पेड़ों को भी राखियों से बांधे, ताकि पेड़ों की रक्षा हो सके और पेड़ों की कटाई बंद हो. जिससे हमारा पर्यावरण हरा भरा रहेगा.

 

 



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