चतरा : माइनिंग कंपनी पर गांव-गणराज्य समर्थकों ने किया हमला, हथियारों से लैस थे हमलावर, की हवाई फायरिंग

Chatra : वशिष्ट नगर जोरी थाना क्षेत्र के करमाली गांव में चल रहे पत्थर माइन्स बंद कराने को लेकर गांव-गणराज्य के संस्थापक विनय सेंगर ने माइनिंग कंपनी पर जोरदार हमला बोला है। सेंगर ने पारंपरिक हथियारों से लैस अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ बुद्धा पत्थर कंपनी पर हमला बोला। हमले में कम्पनी में जमकर तोड़फोड़ की गयी, सामानों को क्षतिग्रस्त किया गया। इतना ही नहीं कर्मचारियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया और हवाई फायरिंग भी की गयी। हमले में काफी लोग घायल हो गये हैं। घायलों का इलाज स्थानीय अस्पताल में चल रहा हैं, वहीं गंभीर स्थिति वालों को गया के मगध मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया है। घटना के बाद विनय सेंगर सहित दो दर्जन लोगों के खिलाफ जोरी थाना में मामला दर्ज करवाया गया है।

हमले से खौफजदा है व्यवसायी वर्ग

गांव-गणराज्य समर्थकों के डर से जोरी थाना क्षेत्र में संचालित पत्थर व्यवसाय पर ताला लटक गया है। बुद्धा माइनिंग कंपनी में गांव-गणराज्य समर्थकों ने जिस तरह हमला किया, उससे व्यवसायी वर्ग खौफजदा हैं। चारो ओर टूटी-फूटी कुर्सियां और बिखड़े पड़े सामान इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि हमला कितना जोरदार था। कंपनी के लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागते रहे, फिर भी उनको दौड़ा-दौड़ा कर पीटा गया।

सेंगर ने मांगा था पांच लाख की फिरौती

बुद्धा माइनिंग के संचालक विनय कुमार ने बताया कि गांव-गणराज्य के संस्थापक विनय सेंगर ने उनसे पांच लाख रूपये फिरौती के तौर पर मांगा था। वहीं पैसे देने से इनकार करने के बाद सेंगर ने गुंडों को बुलवाकर कंपनी के कर्मचारियों पर हमला करवा दिया। विनय ने स्थानीय पुलिस पर भी सेंगर के साथ साठ-गांठ का आरोप लगाया है। वहीं उन्होंने कहा कि झारखंड की मौजूदा सरकार उद्योग-धंधे के लिए व्यवसाइयों को आमंत्रित तो कर रही है, पर उन्हें पर्याप्त सुरक्षा मुहैया नहीं कराया जा रहा है। अगर ऐसा ही चलता रहा तो व्यवसाई यहां से पलायन के लिए मजबूर हो जायेंगे।




दस दिन पहले किया था धरना प्रदर्शन

गौरतलब है कि दस दिन पूर्व पत्थर माइन्स बंद कराने को लेकर गांव-गणराज्य के संस्थापक विनय सेंगर के नेतृत्व में धरना प्रदर्शन किया गया था। उस वक्त सदर एसडीएम राजीव कुमार ने दस दिनों के अंदर गांव-गणराज्य के आरोपों की जांच कराने का आश्वासन दिया था, जिसके बाद चौथे दिन आंदोलनकारियों ने अपना अनशन समाप्त कर दिया था। लेकिन दस दिनों के बाद भी जांच और कार्रवाई नहीं होने पर क्षुब्ध हो कर आंदोलनकारी करमाली गांव पहुंचे और हंगामा कर माइंस को बंद करवा दिया। मामले को लेकर माइंस संचालक ने थाना में शिकायत दर्ज करवाया है।

हेवी ब्लास्टिंग से गांव के घरों को हो रहा नुकसान

गांव-गणराज्य के संस्थापक विनय सेंगर का आरोप है कि सरकार ने नियमों को ताख पर रख कर पत्थर व्यवसाइयों को खनन पट्टा आवंटित कर दिया है। साथ ही कहा कि माइन्स में होने वाली हेवी ब्लास्टिंग से गांव के घरों को नुकसान हो रहा है। इलाके का जल स्तर भी घटता जा रहा है। पर्यावरण भी इसके नुकसान से अछूता नहीं है। उन्होंने कहा कि एसडीएम के आश्वासन के बाद भी मामले की जांच नहीं की कई। उल्टा उनके खिलाफ ही थाना में झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया गया। अब आंदोलनकारियों ने फिर से अपना अनशन शुरू कर दिया है। अनशन की सूचना पर एसी, एसडीएम, खनन निरीक्षक और सीओ अनशन स्थल पर पहुंचे। मौके पर आंदेलनकारियों ने बताया कि पत्थर माफियाओं ने उनके आंदोलन को दबाने के लिए थाने में झूठा मुकदमा दर्ज करवाया है। सेंगर ने कहा कि माइंस बंद होने और झूठा मुकदमा वापस लेने के बाद ही अनशन खत्म किया जाएगा। बता दें कि आंदोलनकारियों में गांव-गणराज्य, चेतना भारती और महिला मुक्ति संघर्ष समिति के कार्यकर्ता शामिल हैं।

कुछ भी बोलने से बच रहे जोरी थाना प्रभारी

माइन्स पर हमले के मामले में जोरी थाना प्रभारी शिव गोप कुछ भी बताने से इनकार कर रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर पत्थर माइनिंग कंपनी के संचालक और आंदोलनकारी दोनों ही एक-दूसरे पर जोरी थाना प्रभारी के साथ सांठ-गांठ का आरोप लगा रहे हैं। अगर समय रहते वरीय अधिकारियों ने मामले पर संज्ञान नहीं लिया तो इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पूरा इलाका रणक्षेत्र में लब्दील हो जाएगा।





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