रांची: चर्च प्रमुख ने दिया बयान- मिशनरीज ऑफ चैरिटी से नहीं गायब हुए 208 बच्चे

church came forward to support missionary charity रांची: मिशनरीज ऑफ चैरिटी में बच्चों की खरीद-फरोख्त की खबर और कोचांग में हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले में फादर और सिस्टर के मिले होने की खबर से आहत चर्च ने अब अपना पक्ष रखा है. झारखण्ड में मिशनरी समाज की गिरती शाख को देखते हुए देश में चर्च के सबसे बड़े निकाय, कैथोलिक बिशप्स कांफ्रेंस ऑफ इंडिया के महासचिव , बिशप थियोडोर मास्करेन्हास ने कल मीडिया से बात की. उन्होंने कहा कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी की अनिमा इंदवार चैरिटी की कर्मचारी थी ना कि सिस्टर. उसनें पैसों के लालच में एक बच्चे का सौदा कर दिया, जो की गलत था. लेकिन इसके लिए पूरी चैरिटी और मिशनरी समाज को बदनाम करना गलत है.




साथ ही उन्होंने कहा कि 280 बच्चों वाली बात बिलकुल झूठ है. उन्होंने कहा कि पुलिस ने सिस्टर कोंसिलिया को अरेस्ट करने के बाद 8 दिन किसी से मिलने नहीं दिया. जब उनके वकील 10 मिनट के लिए सिस्टर से मिले, तब पता चला कि सिस्टर से जबरदस्ती पेपर पर बयान लिखवाया गया और हस्ताक्षर करवाया गया है.

चर्च प्रमुख ने कहा कि मिशनरी से गोद लिए बच्चों को ढूंढ़कर परेशान किया जा रहा है. बच्चों को उनके माता-पिता से अलग करना गलत है.

साथ ही कोचांग मामले में भी उन्होंने फादर का पक्ष लिया. उन्होंने कहा कि फादर को तो पता ही नहीं था कि कोई नाटक मंडली आ रही है. पुलिस को चाहिए कि मुखिया या उसे पकड़े जिसने उन्हें नाटक के लिए बुलाया था.





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