खबरें अदालत की : नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 10 साल की सजा

दुष्कर्म के आरोपी को सजाबोकारो : बोकारो के जिला जज-1 सह फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश रंजीत कुमार की अदालत ने सोमवार को अपने एक फैसले में नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी दिवाकर रवानी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनायी. मामले के विशेष लोक अभियोजक आरके राय के अनुसार आसनसोल, सियालजोरी निवासी दिवाकर रवानी ने महुदा (धनबाद) की रहने वाली एक नाबालिग लड़की को बंगलोर ले जाकर उसके साथ लगातार दुष्कर्म किया. मामला दो वर्ष पहले का है. इस बावत सियालजोरी थाने में कांड संख्या- 58/16 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी.

सेशन ट्रायल नंबर- 226/17 के तहत अदालत में दर्ज मामले में आरोपी को दोषी पाया. जब बंगलोर में पीड़िता गर्भवती हो गयी तो आरोपी ने उसका गर्भपात करवा दिया. उसके बाद भी फिर उसने नाबालिग युवती के साथ दुष्कर्म किया और युवती पुनः गर्भवती हो गयी. जिसके बाद नाबालिग ने एक बच्ची को जन्म दिया, जो बच्ची अब डेढ़ वर्ष की हो चुकी है. इस बीच आरोपी ने पीड़िता के साथ-साथ उक्त बच्ची को छोड़ दिया तथा एक अन्य महिला के साथ शादी कर ली. इसे लेकर पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज की थी. अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए 10 साल की जेल तथा 10 हजार रुपये का अर्थदंड सुनाया. इसके साथ ही सरकार को पीड़िता को मुआवजा देने का भी आदेश दिया. जुर्माना की राशि 10 हजार रुपये भी पीड़िता को दी जाएगी.




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दहेज हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

बोकारो के जिला जज-1 सह फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश रंजीत कुमार की अदालत में सोमवार को दहेज हत्या के एक आरोपी संजय हाजरा को उम्रकैद की सजा सुनायी गयी. एसटी नंबर- 192/09 एवं चास मुफस्सिल थाना कांड संख्या- 36/09 के तहत दर्ज इस मामले में अदालत ने संजय हाजरा (28 वर्ष) को बाबी देवी पत्नी की दहेज की खातिर हत्या के आरोप में दोषी करार दिया था. मामले के विशेष लोक अभियोजक आरके राय ने बताया कि चास मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत बांधडीह, चिताईटांड़ निवासी संजय हाजरा की शादी बचपन में ही उसी गांव की बाबी देवी के साथ हुई थी. उस वक्त बाबी की उम्र मात्र छह साल की थी. विवाह के बाद बाबी अपने मायके में रहने लगी और बालिग होने पर वह अपने ससुराल आयी. ससुराल आने के बाद उसका पति संजय हाजरा 10 हजार रुपया और एक मोटरसाइकिल के लिये लगातार उसे प्रताड़ित करने लगा.

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इसी क्रम में 23 अप्रैल, 2009 को उसने बाबी देवी को जहर खिला दिया. घटना के बाद बाबी को एक निजी नर्सिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने अपने भाई व पिता को पति द्वारा जहर दिये जाने की बात बतायी और उसी दिन उसकी मृत्यु भी हो गयी. रांची से कराये गये विशेष वैज्ञानिक अनुसंधान में भी मृतका को जहर दिये जाने की पुष्टि हुई थी. अदालत ने भादवि की धारा 302 तथा आरोपी संजय हाजरा को आजीवन कारावास तथा 10 हजार रुपया जुर्माना की सजा सुनायी.

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