डीडीसी ने चास प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र का किया औचक निरीक्षण, दो डॉक्टरों का वेतन कटा

औचक निरीक्षणबोकारो : केन्द्र सरकार ने गरीबों को स्वास्थ्य बीमा का वरदान आयुष्मान भारत योजना के तहत तीन माह पहले दे तो दिया, लेकिन सरकारी योजनाओं का हाल क्या होता है, वह भी हमारे देश में, यह जगजाहिर है.

महत्वकांक्षी आयुष्मान भारत योजना बोकारो जिले में ऐसी ही शिथिलता का शिकार बन रही है. सरकार की योजना को लागू करने के मामले में सरकारी अस्पतालों में ही लचरता सामने आ रही है. यह हम नहीं, खुद जिले के आला अधिकारी भी इस बात को मान रहे हैं. जिले के उपविकास आयुक्त रविरंजन मिश्रा ने चास प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के औचक निरीक्षण के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में इसका खुलासा किया.

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत योजना के तहत जिले के सरकारी अस्पतालों में क्लेम (दावों) की स्थिति बेहद खराब है. उन्होंने इस पर चिन्ता जाहिर की और कहा कि उन्होंने इस मामले को गंभीरता से लिया है. विगत 10 दिनों में उनके निर्देश पर कुछ सुधार दिख रहा है. 10 दिनों में 12 क्लेम हुआ है, जबकि जिले में 100 से ऊपर मामले आये हैं. उसके पहले जीरो था. प्रशासन सरकारी अस्पतालों में इसमें सुधार लाने को प्रयासरत है. फिर भी हमलोग अपेक्षित लक्ष्य नहीं पूरा कर पा रहे हैं. विगत दिसम्बर, 2018 माह चास में 383 संस्थागत प्रसव कराये गये. उस हिसाब से कम से कम 100 क्लेम होना चाहिये था. 10 दिनों में 35 क्लेम होने थे, लेकिन नहीं हुआ. इससे जाहिर होता है कि सरकारी डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी कहीं न कहीं अपने कार्यों के प्रति उदासीन हैं. उनकी उदासीनता दूर कर स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं में पिछड़ी उपलब्धियों को बढ़ाने के लिये ही उन्होंने औचक निरीक्षण किया.




डीडीसी मिश्रा ने इस बात को माना कि स्टाफ और एएनएम की कमी है. उन्‍होंने कहा कि कुछ को टैगिंग किया गया है. आईएफए जैसी आवश्यक दवाइयां, जो उपलब्ध नहीं थी, उन्हें उपलब्ध करा दिया जायेगा. उन्होंने बताया कि रोस्टर के तहत जिन चिकित्सकों को स्वास्थ्य केन्द्रों पर प्रतिनियुक्त किया गया है, उनकी औचक जांच भी की गयी है. इसके तहत टुपरा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा सिमुलिया पीएचसी में रोस्टर पर प्रतिनियुक्त डॉक्टर ससमय अपने अस्पताल में उपस्थित नहीं मिले. इसके लिये तत्काल कार्रवाई करते हुए उनके वेतन को स्थगित करने का आदेश दिया गया है. उन्होंने कहा कि रोस्टर के नियमों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाये. इसके लिये प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को भी निर्देशित किया गया है, जो भी डॉक्टर इसमें शिथिलता बरतेंगे, उनके विरुद्ध भी कार्रवाई होगी.



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