आयुष्मान बीमा होने के बावजूद अस्पताल ने मरीज से वसूले 50 हजार रु.,अब 30 हजार रु. के लिए मरीज को बनाया बंधक

बूटी मोड़ स्थित गुलमोहर अस्पताल की घटना

रांची : प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत से गरीबों को बहुत ही उम्मीद थी कि उनके  बेहतर इलाज की जिम्मेवारी आयुष्मान भारत के गोल्डन कार्ड से पूरी हो जाएगी, बस यही सोच कर जसीमा के परिवार ने आयुष्मान कार्ड बनवाया था, मगर  जब अस्पताल इलाज के लिए पहुंची, तो आयुष्मान बीमा होने के बावजूद निजी अस्पताल ने परिजनों से 50 हजार रुपये वसूल लिया और अब 30 हजार रुपये के लिए मरीज को बंधक बनाए रखा है.

परिजनों से प्रबंधन ने वसूले मनमाने पैसे   

निजी अस्पतालों की मनमानी आए दिन सामने आ रही है. धनबाद जिले के वासेपुर की  रहने वाली 42 वर्षीय जसीमा खातून के दाहिने पैर की जांघ की हड्डी टूट गई. परिजनों ने इलाज के लिए उसे बूटी मोड़ स्थित गुलमोहर अस्पताल में भर्ती कराया. परिजनों द्वारा आयुष्मान कार्ड दिखाए जाने के बावजूद अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के इलाज के लिए मनमाना पैसा वसूल लिया और  कहा कि यहां आयुष्मान भारत योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार वालों ने कर्ज़ लेकर कर 50 हजार रूपये अस्पताल प्रबंधन के पास जमा करा दिया, जबकि उन्हें आयुष्मान बीमा से जुड़ते  समय उन्हें उम्मीद थी कि उनके इलाज का खर्च आयुष्मान बीमा के तहत हो सकेगा.

पैसे नहीं देने पर ऑपरेशन करने से इंकार कर दिया

अस्पताल प्रबंधन परिजन से बेड चार्ज, दवाइयां और ऑपरेशन के लिए पैसे के लिए लगातर दबाब बनाता रहा. पैसे नहीं देने पर ऑपरेशन करने से इंकार कर दिया गया. परिजनों ने अस्पताल को जब 10 हजार रुपये दिए, तब जाकर मरीज का  ऑपरेशन किया गया. अस्पताल प्रबंधन   परिजनों से 50 हजार ले चुका है और अब परिजनों से 30 हजार रुपये की मांग की जा रही है. आर्थिक रूप से कमजोर कर्ज के बोझ तले दबे परिजनों के पास इतने पैसे नहीं कि वह अस्पताल प्रबंधन को देखकर अपने मरीज को डिस्चार्ज करा सकें.

 



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