चलो विकास की ओर- विवादित पत्थलगड़ी को स्वेच्छा से उखाड़ फेंकने वाला चितरामु पहला गांव

Disseminate disputed Pathaldhali chitramu khuntiखूंटी : झारखण्ड में विवादित पत्थलगड़ी को स्वेच्छा से उखाड़ फेंकने का काम खूंटी प्रखंड के चितरामु गांव के ग्रामीणों ने किया है. चितरामू गांव को जिला प्रशासन ने कई सौगात से नवाजा और गांव के ग्रामीणों के बीच करोड़ों रूपए की परिसंपत्तियों का वितरण किया गया. गांव के ग्रामीण अब विकास की बात कर रहे हैं और गांव में विकास की उम्मीद जगी है. जिला प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वस्त कराया कि जल्द ही पत्थलगड़ी के स्वंयभू नेताओं को गिरफ्तार कर लिया जायेगा. खूंटी राज्य में नहीं देश में जाना जायेगा कि कानून सबके लिए एक है और यह कोई पत्थरों पर लिखा सविंधान नहीं है.

खूंटी में चर्चित और नासूर बनी पत्थलगड़ी को चितरामु गांव के ग्रामीणों ने जैसे ही जमीन पर गिराया, जिला प्रशासन दुसरे दिन गांव में करोडो की योजना लेकर पहुंच गई और लोगों की जरुरत के अनुसार उनको दिया. पहली बार जिला प्रशासन ने मंच से वादा किया कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं और गुनहगार जहां भी रहे उसे जेल भेजने का काम करेगी.




समानांतर सरकार चलाने वालों ने गांव का विकास और ग्रामीणों का विकास का वादा किया था लेकिन पिछले दो वर्षों में नहीं हुआ जिसका नतीजा ग्रामीणों ने विरोध करते हुए एक मिशाल कायम किया है और ग्रामीण अब गांव का विकास चाहते हैं. शनिवार को जनता दरबार में हजारों ग्रामीण पहुंचे और लाभान्वित हुए और सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया. गांव में पहुंचे विकास योजना से ग्रामीण काफी उत्साहित हैं और सरकार से गांव की विकास के लिए योजनाएं मांग रहे हैं.

चितरामु गांव के ग्रामीणों में जागरूकता आने से खूंटी में विकास की उम्मीद जगी है और ग्रामीण अब समानांतर सरकार चलाने वालों के साथ नहीं बल्कि विकास करने वाली सरकार के साथ चलने को तैयार है. जिला प्रशासन भी ग्रामीणों का भरोसा जितने के लिए उनके अनुसार गांव में योजना पहुंचा रही है ताकि सरकार और जिला प्रशासन के बीच जो दुरिया बढ़ी है वो मिट सके. और जिला प्रशासन बेख़ौफ़ होकर क्षेत्र में जाकर सरकारी योजनाओं की शुरुआत कर सके.





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