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डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 117वीं जयंती, इनका एक रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ पाया

DOCTOR SHYAMA PRASAD MUKHARJIरांची : बीजेपी के प्रमुख नेताओं में सुमार डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कोलकाता में हुआ था. उनके पिता का नाम आशुतोष मुखर्जी और माता का नाम जोगमाया देवी मुखर्जी था. उनके पिता एक प्रतिष्ठित वकील थे और बाद में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति भी बने.

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बीजेपी धारा 370 को ख़त्म करने का मुद्दा चुनावी वादे के रूप में करती रही है. लेकिन इस पर सबसे पहली चोट डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने की थी. उन्होंने उस समय कश्मीर में दो प्रधानमंत्री का विरोध किया. इस दौरान उन्होंने एक देश में दो विधान, एक देश में दो निशान, एक देश में दो प्रधान, नहीं चलेंगे नहीं चलेंगे जैसे नारे दिए.




डॉ मुखर्जी ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से 1921 में ग्रेजुएशन किया. इसके बाद उन्होंने बैचलर्स ऑफ़ लॉ भी किया. इसके बाद वह ब्रिटेन चले गए और 1927 में बैरिस्टर बनकर वापस लौटे. मात्र 33 वर्ष की उम्र में इन्होने कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति की पदवी संभाली. वह सबसे कम उम्र के कुलपति बने. आज तक भारत में इतनी कम उम्र में कुलपति कोई नहीं बन पाया. 1938 तक मुखर्जी इस पद पर रहे. इस दौरान उन्होंने कई सुधार भी किए तथा ‘कलकत्ता एशियाटिक सोसायटी’ में सक्रीय रूप से हिस्सा भी लिया. वे ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस’ बेंगलुरु के परिषद और कोर्ट के सदस्य रहे. वह इंटर-यूनिवर्सिटी ऑफ़ बोर्ड के चेयरमैन भी रहे. 1929 में इन्होने राजनीति में कदम रखा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में बंगाल विधानसभा के सदस्य चुने गए. बाद में वह इंडिपेंडेंट कैंडिडेट के तौर पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की. 1941-42 में वह बंगाल के वित्त मंत्री भी रहे. बाद में उन्होंने हिन्दू महासभा को ज्वाइन किया और 1944 में वे इसके अध्यक्ष भी नियुक्त किए गए.



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