डॉक्‍टर नहीं कर्मचारी करते हैं पोस्‍टमार्टम, चीर-फाड़ के एवज में परिजनों से लेते हैं 5 हजार रुपये (देखें वीडियो)

सदर अस्‍पताल

सुदेश कुमार

सरायकेला : सड़क दुर्घटना में किसी की मौत हो जाना आजकल आम बात है, लेकिन सरायकेला-खरसावां जिले में ये बात कुछ अलग ही कहानी बयां करती है. यहां दुर्घटना के बाद पुलिस पोस्टमार्टम तो कराती है, लेकिन उसके पैसे परिजनों को देना पड़ता है. जी हां पोस्टमार्टम हाउस में पांच हजार रुपए देने के बाद ही लाश परिजनों को सौंपा जाता है. ये हाल है जिले के सदर अस्‍पताल का. यहां पोस्‍टमार्टम कर्मचारी को वेतन नहीं मिलता है, इसलिए वे परिजनों से 5 हजार रुपये वसूलते हैं. डॉक्‍टर के बदले ये कर्मचारी ही पोस्‍टमार्टम करते हैं.

पोस्टमार्टम करने वाले कर्मचारी डंके की चोट पर सरकार और जिला प्रशासन को चुनौती देते हुये जबरन अवैध शुल्क की मांग करते हैं. उनका कहना है कि पिछले 11 वर्षों से पोस्टमार्टम कर रहे हैं. पोस्टमार्टम हाउस का ताला एवं औजार भी अपने पैसे से बाजार से खरीद कर लाये हैं. सरकार न तो वेतन देती है और न ही औजार. पोस्‍टमार्टम में सहयोग के लिए बाहर से लड़के को लाते हैं उसे भी हमें ही पैसा देना पड़ता है तो हम क्‍या करेंगे. पैसा तो लेंगे ही. पोस्‍टमार्टम डॉक्‍टर द्वारा करने के बजाय कर्मचारी करते हैं और इसके एवज में पैसे की मांग करते हैं, क्‍योंकि उनको वेतन नहीं मिलता है. सवाल है कि डॉक्‍टर पोस्‍टमार्टम नहीं करते हैं तो रिपोर्ट कैसे बनती है. कर्मचारी शव का चीर फाड़कर परिजनों को सौंप देते हैं और इसके एवज में 5 हजार रुपये लेते हैं.

Read More : असमाजिक तत्वों की योजना विफल, छावनी में तब्दील हुआ शहर

Read More : रांची : 14 लड़कों ने नाबालिग का बनाया आपत्तिजनक वीडियो, चार हिरासत में





पुलिस शव को पोस्‍टमार्टम के लिए अस्‍पताल भेज देती है, मगर शुल्‍क परिजनों को चुकानी पड़ती है

ट्रेलर की चपेट में आने से 18 साल के नौजवान की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई. परिजनों को फिक्र है इसका अंतिम संस्कार कैसे किया जाए. मुआवजे की मांग के लिए परिजनों के साथ ग्रामीणों ने भी सड़क जाम कर दिया. सरायकेला- खरसावां जिले के राजनगर थाना अंतर्गत केसरगडिया के समीप ग्रामीणों की भीड़ जुटी रही. पुलिस भी घटनास्थल पर पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सरायकेला सदर अस्पताल भेज दिया. पुलिस पोस्टमार्टम तो कराएगी, लेकिन इसके एवज में अवैध रूप से मांगे जानेवाले पांच हजार रुपये के शुल्क का भुगतान नहीं करेगी, क्‍योंकि बीडीओ ने यह साफ तौर पर कहा है कि प्रशासन की ओर से कोई शुल्क नहीं दी जायेगी.

Read More : मुख्यमंत्री ने 2645 पुलिस अवर निरीक्षकों को सौंपा नियुक्ति पत्र, कहा- गरीब लोकतंत्र का पांचवां स्तम्भ

दुर्घटना के बाद परिजनों की हालत पहले खराब रहती है. परिजन अपनों के जाने का मातम मना रहे होते हैं. वहीं अस्‍पताल परिजनों से पोस्‍टमार्टम के एवज में 5 हजार रुपये की मांग की करती है. पुलिस न तो पोस्‍टमार्टम का शुल्‍क अदा करती है और न ही इस अवैध धंधे को बंद कराने का प्रयास करती है. जिसका खामियाजा मातम मना रहे परिजनों को भुगतना पड़ता है.

Read More : श्रावणी मेला के दौरान कर्तव्‍यहीनता के आरोप में तीन पुलिसकर्मी निलंबित





Loading...
WhatsApp chat Live Chat