डोमिसाइल आंदोलन के मृतकों को दी गई श्रद्धांजलि, लड़ाई अब तक अधूरी

Domiseles Battle Tribute martyrsरांची : झारखंड के राजनीतिक इतिहास में हमेशा ही डोमिसाइल का मुद्दा जीवंत रहेगा.  डोमिसाइल की लड़ाई में शहीद होने वाले कैलाश, विनय और संतोष को मंगलवार को श्रद्धांजलि दी गई. नम आंखों से लोगों ने डोमिसाइल की लड़ाई में शहीद होने वाले युवकों को याद करते हुए लड़ाई को अंजाम तक पहुंचाने का संकल्प लिया.

झारखंड की राजनीति में सन 2002 का दिन हमेशा याद किया जाता रहेगा.  बाबूलाल मरांडी के शासनकाल में डोमिसाइल को लेकर बिगड़ते माहौल के बीच कई लोगों की जान चली गई. डोमिसाइल की लड़ाई में शहादत देने वालों में कैलाश, विनय और संतोष का नाम कभी नहीं भुलाया जा सकता.  शहादत दिवस के मौके पर रांची के मेकॉन कॉलोनी में आदिवासी मूलवासी समाज ने श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उनके अधूरे सपनों को साकार करने का संकल्प लिया.

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डोमिसाइल की लड़ाई भले ही थम गई हो, पर मुद्दा आज भी वहीं के वहीं खड़ा है.  स्थानीय नीति और नियोजन नीति को लेकर सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई की आवाज फिर से सुनाई दी. नेताओं के अनुसार डोमिसाइल की लड़ाई तब तक अधूरी है जब तक कि आदिवासी मूलवासियों को उनका वाजिब हक ना मिल जाए. कैलाश विनय और संतोष की शहादत के बहाने राजनीति करने वाले अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में लगे है.

डोमिसाइल ने झारखंड की राजनीति ही नहीं, समाज में भी एक लंबी लकीर खींचने का काम किया. आज भी इस लकीर के दोनों ही तरफ अलग-अलग लोग और दल खड़े नजर आते हैं. संभवतः यही राजनीति है और यही राजनीति करने वालों का तकाजा है.





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