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सरायकेला : ड्रीम प्रोजेक्ट दम तोड़ते हुए, 6 साल से बन रही है, बनते ही उखड़ जा रही है सड़क

Dream project Saraikela Kharsawanसरायकेला : ड्रिम प्रोजेक्ट  के घरातल पर उतरने से पहले ही दम तोड़ते नज़र आ रही है. यह  मामला सरायकेला जिला के खरसावां प्रखंड की है, जहां खरसावां-रड़गांव सड़क बनते ही उखड़ जा रही है. यह सड़क 6 साल से बन रही है, जो आज तक पूरी नहीं हुई. सड़क 54 करोड़ की लागत से  पथ परिवहन विभाग द्वारा न्यू दिल्ली की कम्पनी एएनपीसी  से निर्माण करवाया जा रहा है. इस सड़क के बन जाने से रांची की दूरी 90 किमी कम हो जाएगी. यह सपना 6 वर्ष पूर्व झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुण्डा का था. वर्तमान में ड्रिम प्रोजेक्ट धरातल पर उतरने से पहले ही दम तोड़ते नज़र आ रही हैं.

खरसावां को एनएच-33 से जोड़ेगी यह सड़क

खरसावां को एनएच-33 से जोड़ने के लिए खरसावां-रड़गांव सड़क का निर्माण हो रहा है. 54 करोड़ की लागत से 29 किमी लंबी सड़क बनाई जा रही है. यह सड़क बन जाने से खरसावां के साथ-साथ चाईबासा, सरायकेला के लोगों के लिए भी राजधानी रांची का सफर काफी कम समय में पूरा हो पाएगा. फिलहाल खरसावां के लोगों को काड्रा चौका होते हुए रांची जाना पड़ता है. सड़क के बन जाने से रांची की दूरी करीब 90 किमी कम हो जाएगी.

बनते ही उखड़ जा रही खरसावां-रड़गांव सड़क




यह सड़क पांच साल से बन रही है, जो आज तक पूरी नहीं हुई. सड़क 54 करोड़ की लागत से बनाई जा रही है. इस सड़क के बन जाने से रांची की दूरी 50 किमी कम हो जाएगी. सड़क में अनियमितता की शिकायत पर उपायुक्त छवि रंजन ने बुधवार को निर्माणाधीन खरसावा-रड़गांव सड़क का निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान सड़क निर्माण में काफी अनियमितताएं पाई गई. निर्माणाधीन सड़क बारिश की पहली फुहार भी नहीं झेल सकी. निरीक्षण के दौरान पाया कि निर्माणाधीन सड़क की पीच कई जगहों पर उखड़ रही है. कई जगहों पर सड़क दब गई है. कई स्थानों पर सड़क में दरार आ गई है. निर्माण कार्य पर उपायुक्त ने भी असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सड़क निर्माण कार्य की जांच की जाएगी. इसके लिए जिला स्तर पर एक टीम का गठन किया जाएगा. टीम जांच कर रिपोर्ट देगी. जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

उखड़ती पीच पर डाली जा रही दूसरी परत

ग्रामीणों ने बताया कि यह सड़क पांच साल से बन रही है. 50 फीसदी भी काम नहीं हुआ है. पिछले साल भी खरसावां से करीब तीन-चार किमी तक सड़क पर पीच की एक परत डाली गई थी जो पिछले साल बारिश में बह गई. इस साल एक बार फिर एक लेयर कालीकरण किया जा रहा है. परंतु बारिश होने के साथ ही वह भी उखड़ने लगा है. ठेकेदार द्वारा उखड़ी पीच पर ही दूसरी लेयर की पीच डाली जा रही है. निर्माण स्थल पर योजना से संबंधित बोर्ड भी नहीं लगाया गया है. स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य में अनियमितता की शिकायत करते हुए जांच की मांग की है.

किसी ने खूब कहा है  सिर्फ सपनों से उड़न भरा नहीं जा सकता. जिस जूनून से योजना बनती है उसे धरातल पर उतारने का भी जूनून होना चाहिए.



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