साइक्लोनिक सर्कुलेशन और बारिश के बावजूद झारखंड में सूखे के हालात

* बारिश के बावजूद नहीं बदले हालात

* प्रदेश पर अभी भी मंडरा रहा सूखे का खतरा

Drought hazard Jharkhandरांची : जबरदस्त साइक्लोनिक सरकुलेशन और बारिश के बावजूद झारखंड में सुखाड़ का संकट नहीं टल पाया है, जितनी बारिश हुई है वह खेतों की रोपनी के लिए  पर्याप्त नहीं है. पेश है एक रिपोर्ट.

पिछले 2 दिनों से झारखंड भर में जबरदस्त बारिश का माहौल है. रुक-रुक कर बारिश भी हो रही है. मगर इस तरह की बारिश से खेतों के हालात नहीं बदल पाए हैं. पिछले 24 घंटों की बात करें तो जमशेदपुर में अठ्ठासी मिलीमीटर, चाईबासा क्षेत्र में 74 मिलीमीटर डाल्टेनगंज एरिया में 51 मिलीमीटर और रांची और इसके आसपास सिर्फ और सिर्फ 28 मिलीमीटर बारिश हुई है. अभी भी झारखंड में औसतन 38 फ़ीसदी कम बारिश का रिकॉर्ड कायम है.




 हालांकि अगले 24 घंटो तक भी झारखंड के कई जिलों में बारिश की संभावना बनी हुई है. चाईबासा, रांची और खूंटी के आसपास भारी बारिश की भी उम्मीद है. मगर इतनी बारिश से झारखंड के सभी खेतों में धान की रोपाई मुमकिन नहीं है. आखिर क्या कारण है बंगाल की खाड़ी में सिस्टम बनता है मगर बारिश के बादल झारखंड होते हुए मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की ओर निकल जाते हैं.

मानसून के झारखंड आगमन से लेकर अब तक कई बार बंगाल की खाड़ी में बारिश के लिए सहायक सिस्टम बना है मगर उस सिस्टम के दाएं और बाएं निकल जाने के कारण झारखंड के खेत खलियान प्यासे रह गए हैं. झारखंड में अमूमन सीढ़ी नुमा खेत है लिहाजा पानी स्टोर करने का कोई उचित माध्यम भी नहीं, लिहाजा किसान पूरी तरह आसमानी बादलों पर निर्भर हैं.

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