अभाव में भी फर्राटा भर रही बेटियां, परिजनों के साथ समाज व सरकार का भी मिल रहा साथ

अभाव में भी फर्राटा भर रही बेटियांनिवेदिता बरनवाल

रांची : सरकार के बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान को पंख लग चुका है. समाज और सरकार के प्रयास से बेटियां आगे बढ़ रही है. सपोर्ट का ही परिणाम है कि आज घर में कैद रहने वाली बेटियां फर्राटा भरती नजर आ रही हैं. बेटियां अच्‍छे अंकों के साथ पास कर कैरियर में कुछ कर गुजरने का जज्‍बा रखती है.

समाज में बेटियों के प्रति लोगों की सोच बदल रही है. पहले जहां बेटियों घरों में कैद रहती थी, और उनके साथ उनके सपने भी घरों में ही कैद होकर रह जाती थी. आज समाज में बेटियों के प्रति सोच बदली है, और बेटियां समाज के विश्‍वास पर खड़ा उतर रही है. हर क्षेत्र में आज बेटियां बेटों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं. चाहे वो आईएएस, आईपीएस या फिर और कोई दूसरा क्षेत्र हो, हर क्षेत्र में लड़कियां बेहतर कर रही हैं.

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आर्थिक संकट भी बेटियों के सपने में नहीं बन रही बाधा

सपने देखने का हक हर किसी को है. चाहे वह कोई बड़े इंडस्ट्रियलिस्ट का बच्चा हो या किसी लोअर मी‍डिल क्‍लास के व्‍यक्ति का. हर किसी का सपना होता है कि वह पढ़-लिखकर कुछ बड़ा करे. पर बढ़ती महंगाई और घर की बढ़ती जरूरतों को पूरा करना हर किसी के बस में नहीं होता. ऑटो चालक, मैकेनिक, ड्राइवर या दिहाड़ी मजदूर जिनकी मासिक आमदनी ज्यादा नहीं होती उनके लिए घर खर्च के अलावे बच्‍चों की पढ़ाई का खर्च उठाना कठिन होता है, मगर आज परिस्थितियां बदल चुकी है. लोअर क्‍लास और मीडिल क्‍लास के लोग भी अपनी बेटियों को पढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. वे भी अपनी बेटियों के सपने को साकार करने में उनका पूरा सहयोग करते हैं. उनकी बेटियां भी उनके विश्‍वास पर खड़ी उतर रही हैं. तभी तो अभाव में भी ये बच्चियां फर्राटा भर रही है.




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न्‍यूज 11 की टीम ने सरकारी संस्‍थाओं में पढ़ने वाले लोअर और मीडिल क्‍लास की बच्चियों से इस संबंध में बात की. बच्चियों ने अपनी जुबानी अपने सपने और अपने परिवार के सपोर्ट की कहानी बयां की. बच्चियों ने बताया कि उनके परिजन उनके सपनों को पूरा करने में आर्थिक संकट को आड़े नहीं आने दे रहे हैं. उनका परिवार उनको पूरा सपोर्ट कर रहा है. साथ ही सरकार और समाज से भी उनको सपोर्ट मिल रहा है.

अपर क्‍लास के साथ-साथ लोअर और मी‍डिल क्‍लास के लोग भी अपनी बेटियों के सपने को साकार करने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते हैं. ये लोग आर्थिक संकट के बावजूद अपनी बेटियों के सपने को टूटने नहीं दे रहे हैं. कहते हैं बेटा शिक्षित होता है तो केवल एक परिवार शिक्षित होता है, मगर जब एक बे‍टी शिक्षित होती है तो दो परिवारों को शिक्षित करती है.

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