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झारखण्ड: बच्चों की थाली में एक साल बाद लौटे अंडे, इस कंपनी को मिला कॉन्ट्रैक्ट

eggs to be supplied in mid day meal again रांची: झारखंड के आंगनबाड़ी केंद्रों से जुड़े बच्चों को अंडे मयस्सर कराने में सरकार को पूरे एक साल लग गए. पायलट प्रोजेक्ट के तहत इसकी शुरूआत रांची, जमशेदपुर तथा दुमका से की गई थी. आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की आमद बढ़ने तथा ड्रॉपआउट की स्थिति में बहुत हदतक सुधार होता देख सरकार ने इसे पूरे राज्य में प्रभावी बनाने का फैसला लिया था.

सरकार का यह फैसला तब तत्काल प्रभाव से लागू तो नहीं हो सका, अलबत्ता 17 मई 2017 से पायलट जिलों में भी इसका वितरण जरूर बंद हो गया. इधर, सरकार ने एक लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर तामिलनाडु की किसान पोल्ट्री फार्म को राज्य के 38,640 आंगनबाड़ी केंद्रों को अंडा मुहैया कराने का दायित्व सौंपा है. कंपनी हर हफ्ते आंगनबाड़ी केंद्रों को 30 लाख 60 हजार अंडे की आपूर्ति करेगा.




महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग के साथ हुए करार के मुताबिक संबंधित संस्था प्रति अंडा 5.93 रुपये (आंगनबाड़ी केंद्रों तक पहुंचाकर) की दर पर अगले एक साल तक अंडे की आपूर्ति करेगी. बताते चलें कि अंडे की आपूर्ति बंद होने के बाद सरकार ने यह काम स्वयं सहायता समूहों के सहयोग से पशुपालन विभाग के माध्यम से पूरा करने का मन बनाया था. विभाग ने पशुपालन विभाग से प्रति सप्ताह 26 लाख 56 हजार अंडे की आपूर्ति करने की मांग रखी थी, परंतु आधारभूत संरचनाओं के अभाव में पशुपालन विभाग ने हाथ खड़े कर दिए थे. इसके बाद आपूर्तिकर्ता का चयन, कैबिनेट की सहमति और अन्य प्रक्रिया पूरा करने में सरकार को एक साल लग गए.



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