आठ वर्षों से उग्रवादियों की गोली फेफड़े में लिये ड्यूटी कर रहा है होमगार्ड का जवान

chatra संजय कुमार

जवान के फेंफड़े के पास फंसी है गोली, पैसे के अभाव में नहीं करा पा रहे इलाज

चतरा : झारखण्ड के चतरा जिले की पहचान पूर्व के दिनों में उग्रवादियों के अभेद किले के रूप में किया जाता रहा है. उग्रवादियों का नाम सुनते ही पहले यहां के लोगों के मन में एक अजीब सी खौफ पैदा हो जाती थी. पर बीते दो-तीन वर्षों में परिस्थितियां काफी बदली है. चतरा जिले से उग्रवाद अब लगभग समाप्ति की कागार पर है. चतरा के वर्तमान युवा, ईमानदार व कर्मठ पुलिस अधीक्षक अखिलेश वी वारियर ने ताबड़तोड़ कार्रवाई कर नक्सलियों की नींव हिला डाली है. जिले से भाकपा माओवादी, जेपीसी, पीएलएफआई और टीपीसी जैसे नक्सली संगठन भागने में ही अपनी भलाई समझी. इक्के-दुक्के बचे नक्सलियों से सरकार की समर्पण नीति के तहत आत्मसमर्पण करने की गुहार लगाई जा रही है. समर्पण नहीं करने वाले नक्सलियों को मार गिराने का ब्लू-प्रिंट पुलिस कप्तान ने पहले से ही तैयार कर रखा है. ऐसा नहीं है कि लोगों को उग्रवादियों से सुरक्षित रखने के लिये जिले में पुलिस बल की कमी है. पर बड़े अफसोस की बात है कि जो पुलिस के जवान चतरा के लोगों को उग्रवादियों से रक्षा करती है, आज वहीं पुलिस के एक ऐसे जवान जो अपने विभाग और सरकारी उपेक्षा का दंश झेलने के बाद तिल-तिल जीने-मरने को मजबूर हैं. ऐसे ही एक होमगार्ड के जवान आरक्षी संख्या 8623 नंदकिशोर तिवारी, पिता श्री रामलखन तिवारी, ग्राम फुलवरिया कढनी निवासी को मुठभेड़ के दौरान लगी गोली आज भी फेंफड़े के आस-पास फंसी हुई है. लेकिन पैसे के अभाव में उसका ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं.

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28 फरवरी 2011 में नक्‍सलियों से हुये मुठभेड़ में लगी थी गोली




28 फ़रवरी 2011 का वो मनहूस दिन जब टंडवा थाना क्षेत्र के लकड़ाही मोड़ के पास पुलिस और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ हो गई. इस मुठभेड़ में तीन होमगार्ड के जवान गेंदा तूरी, हवलदार अखिलेश पासवन एवं जमादार नारायण मंडल मौके पर ही शहीद हो गये और इसी हमले में तीन होमगार्ड के जवान आरक्षी संख्या 8623 नंदकिशोर तिवारी, 8859 कोमल राम तथा 11386 टेकन पासवन के पैर में इन्सास रायफल की गोली लगने की वजह से गंभीर रूप से घायल हो गये थे. उस समय जिले तत्कालीन एसपी प्रभात कुमार (वर्तमान में बोकारो कोयला प्रक्षेत्र के डीआईजी) ने घायल तीनों जवानों को सरकारी नौकरी, समुचित इलाज समेत कई आश्वासन दिये थे. लेकिन एसपी प्रभात कुमार के स्थानांतरण के बाद कई पुलिस अधीक्षक जिले में आये और चले गये. लेकिन तीनों घायल जवानों को अब तक उन घोषणाओं का कोई लाभ नहीं मिल पाया. जबकि तीनों घायल होमगार्ड के जवानों ने राज्य के डीजीपी, मुख्य सचिव व पूर्व उपायुक्त एवं पूर्व एसपी चतरा से लिखित एवं मौखिक गुहार कई बार लगा चुके हैं. बावजूद इसके सरकार या विभाग के तरफ से इन्हें कोई मदद नहीं मिली.

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नित्‍यक्रिया करने में जवान को होती है काफी तकलीफें

होमगार्ड झारखण्ड प्रदेश के महासचिव सह चतरा जिला इकाई के अध्यक्ष आलोक रंजन ने बताया कि होमगार्ड के जवान आरक्षी संख्या 8623 नंदकिशोर तिवारी, पिता श्री रामलखन तिवारी, ग्राम फुलवरिया कढनी निवासी के फेंफड़े के आस-पास अभी भी इन्सास राइफल की गोली फंसी हुई है. लेकिन पैसे के  अभाव में उसका ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है. फेंफड़े के आस-पास गोली फंसे होने की वजह से घायल जवान को नित्यक्रिया करने में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है. लाचार हालत के बावजूद नंदकिशोर तिवारी पिछले 08 वर्षों से जिले के अलग-अलग थाने में अपना योगदान देता आ रहा है. फिलहाल वह सिमरिया थाने के पुलिस निरीक्षक कार्यालय में पदस्थापित है. पीड़ित जवान जिले के वर्तमान युवा, ईमानदार व कर्मठ पुलिस अधीक्षक अखिलेश वी वारियर से काफी उम्मीदे लगाये बैठा है. उसे उम्‍मीद है कि इनके कार्यकाल में उनकी वर्षों पुरानी समस्या समाप्त हो जायेगी. जिससे कि वह पहले की तरह सामान्य जिन्दगी जी सके और फिर से नक्सलियों से लोहा लेने के लिये अपने-आप को तैयार कर सके.

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