भूखे को भोजन कराने रात को मसीहा बनकर निकलती है इन युवाओं की टोली (देखें वीडियो)

जमशेदपुरजमशेदपुर : देश में अधिकतर लोग ऐसे हैं कि जो भूखे पेट रात को सो जाते हैं या कोई मसीहा के तौर पर आता है और भोजन दे जाता है. जी हां जमशेदपुर में ऐसे ही कुछ युवा हैं, जो मसीहा के तौर पर गरीब लोगों को भोजन करवाते हैं. भोजन चाहे उन्हें घर से लाना हो या शादी समारोह से रात्रि में भोजन इकट्ठा करना उनका कार्य है. पढ़िए न्यूज 11 जमशेदपुर रिपोर्टर कौशल सिंह की  विशेष रिपोर्ट.

यह तस्वीर जमशेदपुर के रेलवे स्टेशन की है, जहां युवा स्टेशन पर सोए लोगों को आवाज दे उठाते हैं और भोजन करवाते हैं. आपको बता दें कि आबादी का एक बड़ा हिस्सा अभी भी दो वक़्त  की रोटी की तलाश में ही रहता है. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में भूख एक गंभीर समस्या है और 119 देशों के वैश्विक भूख सूचकांक में भारत 103वें पायदान पर है. लौहनगरी में युवाओं की टोली के द्वारा  किसी  प्रकार की पार्टी अथवा भोग के आयोजन में बचे खाने को लेकर रास्ते में घूम कर, स्टेशन में जाकर गरीब वक़्तियों को खाना खिलाते हैं. इससे खाने की बर्बादी भी नहीं होती है तथा किसी गरीब इंसान को दो जून की रोटी भी नसीब हो जाती है. 2013 में लौहनगरी के कुछ युवाओं के द्वारा शुरू किया गया यह कार्य अब लौहनगरी के अधिकतर युवाओं का काम बन चुका है. सुबह से अपनी ड्यूटी या ऑफिस में कार्य करने के बाद ये सारे युवक सड़कों पर निकल जाते हैं  और जहां पार्टी या किसी प्रकार का आयोजन होता है, वहां से बचे हुए खाने को लेते हैं और गरीबों को खिलाते हैं. वर्तमान में इन युवाओं के साथ शहर के सैंकड़ों युवा काम करते हैं. बर्बाद होने से अच्छा है, खाने को किसी को खिला देना, जब भी खाना बच जाता है, तो हम इनलोगों को फ़ोन करते हैं, और ये सभी लोग खाने को ले जाकर गरीबों को खिलाते हैं.






रात में आए इन युवाओं की टोली को गरीब लोग मसीहा से कम नहीं समझते. इन युवाओं की गाड़ी जब स्टेशन परिसर में प्रवेश करती है, तब सोए लोगों की नींद खुल जाती है और एक आस भरी नजर से इनको देखते हैं और भोजन की आस में उनके पास आ जाते हैं, जिन लोगों की नींद नहीं खुल पाती उनके पास इन युवाओं की टोली पहुंचती है और खाने की अपील करती है.

कहते हैं कि एक उम्मीद किसी के लिए काफी होती है और यही उम्मीद बनकर इन युवाओं की टोली रात्रि में भोजन एकत्रित करते हैं. बेसहारों और गरीब तबके के लोगों की तलाश करते हैं, जो एक वक्त के निवाले के लिए दूसरों से उम्मीद लगाए रहते हैं.





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