वनबंधु और प्रोटोटाइप योजना में धोखाधड़ी मामले में तीन NGO पर प्राथमिकी दर्ज

FIR three NGO case Vanbandhu prototype schemeपाकुड़: जिले के लिट्टीपाड़ा में बहुचर्चित वनबंधु योजना और प्रोटोटाइप योजना में गड़बड़झाला का सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है. पाकुड़ जिले के लिट्टीपाड़ा थाना क्षेत्र में तीन एनजीओ रिएक्ट, संजीवनी परिवार सेवा संस्थान एवं यादगार फाउंडेशन के विरूद्ध प्रोटोटाइप एवं वनबन्धु योजना में सरकारी राशि गबन जालसाजी, धोखाधड़ी किये जाने को लेकर तीन अलग-अलग मामले दर्ज कराए गए हैं.

प्राथमिकी आईटीडीए विभाग के निर्देशक हिरालाल मंडल के लिखित शिकायत पर दर्ज करायी गई है. थाना काण्ड संख्या 69/18 भादवी की धारा 406, 420/34 के तहत संस्था रिएक्ट के अध्यक्ष विनय भारद्वाज, सचिव पंकज कुमार एवं कोषाध्यक्ष सुनील कुमार सिंह कांड संख्या 70/18 भादवी की धारा 406/34 के तहत, यादगार फाउंडेशन के अध्यक्ष नीता सिंहा, सचिव रामबहादूर प्रधान, लिपिक गोपाल मुर्मू, नाजिर नुरूल इस्लाम एवं कोषाध्यक्ष अभिजीत रंजन एवं थाना काण्ड संख्या 406, 408, 409, 420/34 के तहत संजीवनी परिवार सेवा संस्था के अध्यक्ष सीताराम ठाकुर सचिव राकेश कुमार कोषाध्यक्ष ओंकार साहा को नामजद अभियुक्त बनाया गया है.




आईटीडीए के निर्देशक हिरालाल मंडल ने लिखित शिकायत किया है. थाना में प्रोटोटाइप योजना के फेज 3 में वृक्षारोपण के लिए एनजीओ रिएक्ट पटना के साथ एकरारनामा किया गया था. शिकायत के मुताबिक अग्रिम राशि लेने के बाद तत्कालीन परियोजना निर्देशक द्वारा बिना स्थल निरीक्षण किये दुबारा राशि भुगतान कर दिया गया.

उक्त संस्था ने 32 लाख 13 हजार 100 रूपये का समायोजन नहीं किया था. 18 प्रतिशत व्याज के सहित 51 लाख 53 हजार 600 रूपये जमा करने का नोटिस संस्था के अध्यक्ष को दिया गया था. इसके बाबजुद राशि का भुगतान नहीं किया गया. रिएक्ट द्वारा सोनाधनी, लोहरबनी, जिरली, शहरपुर, रधुनाथपुर, बांडु में वृक्षारोपन किये जाने का एग्रिमेंट किया गया था.

आईटीडीए निर्देशक हिरालाल मंडल ने यादगार फाउंडेशन के खिलाफ दर्ज करायी गयी प्राथमिकी में उल्लेख किया है कि संस्था के अध्यक्ष के साथ वनबन्धु कल्याण योजना के तहत स्टेशनरी शॉप का एग्रिमेंट तत्कालीन परियोजना निर्देशक लालचन्द्र डांडेल द्वारा किया गया. संस्था द्वारा राधा, गरीब सेवा, अटल बारहा, सरजोम बारहा, दुर्गा, चमेली, मार्शल, आजीविका सहायता स्टेशनरी शॉप के लिए 15 लाख 10 हजार अग्रिम दिया गया था. जिसका समायोजन नहीं किया गया था. उक्त राशि को लेकर आईटीडीए विभाग ने अध्यक्ष को नोटिश भेजा था. 53 लाख 66 हजार रूपए की असमायोजन राशि को जमा करने के लिए संस्था ने कोई पहल नहीं की.





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