झांसों में धधकती जिंदगी, सफाई मोहर्रिरों का है बुरा हाल, लंबे समय से नहीं मिला है कोई भुगतान

धधकतीआकाश भार्गव

रांची : राज्य में तथाकथित अंतिम सर्वे के रिकार्ड्स को मेनटेन करने के लिए सफाई मुहर्रिरों का पद सृजित किया गया. हालांकि सृजित पद के विरुद्ध किसी प्रकार की कोई नियुक्ति नहीं हुई. इसके बावजूद अनुबंध पर कुछ सौ की संख्या में सफाई मुहर्रिर बहाल किए गए और उन्हें खतियान लेखन का कार्य सौंपा गया. लेकिन आज की तारीख में खतियान लेखन का कार्य भी बंद पड़ा है. वहीं सफाई मोहरर्रिरों की जिंदगी झांसों में धध़कती नजर आ रही है.

खतियान लेखन कार्य का जायजा लेने न्यूज11 की टीम पहुंची. टीम ने पाया कि कमरे में काफी बड़ी संख्या में कुर्सियां पड़ी हैं, मेजें लगी हैं और उन पर खतियान लेखन से संबंधित सादे दस्तावेज नजर पड़े हैं. मौके पर हालात देख कर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि यहां खतियान लेखन का कार्य पूरी तरह से बंद पड़ा है. यहां अंतिम सर्वे के नाम पर जो थोड़ा बहुत काम हुआ उसके रिकॉर्ड्स को मेनटेन किया जाता है. यह सारा जिम्मा सफाई मोहर्रिरों के कंधों पर है. लेकिन लंबे समय से उन्हें कार्य आवंटित नहीं किया गया है और ना ही उन्हें उनके मेहनताने का भुगतान किया गया है. जिसकी वजह से आज उनके समक्ष भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो गई है.




सोमारी देवी पिछले 10 सालों से भी अधिक समय से यहां सफाई मोहर्रिर के तौर पर खतियान लेखन का कार्य करती चली आ रही हैं. लेकिन पिछले 4 सालों से उन्हें एक भी पैसा नहीं मिला है, जिसके कारण परिवार का भरण पोषण मुश्किल में पड़ गया है. कुछ लोग यह समझते हैं कि यहां कैथी में लिपिबद्ध भू-अभिलेखों को हिंदी में अनुवादित किया जाता है लेकिन ऐसा नहीं है. यहां कार्यरत किसी भी सफाई मुहर्रिर को कैथी भाषा का ज्ञान नहीं है.

जो तस्वीरें दिखाई उससे दो बातें बिल्कुल स्पष्ट हो जाती हैं एक तो तथाकथित अंतिम सर्वे के आधार पर खतियान लेखन की बात  गलत है. वहीं दूसरी ओर यह सबसे बड़ी कड़वी सच्चाई है कि व्यवस्था इस कदर निष्ठुर है कि यहां कार्यरत सफाई मोहर्रिरों की जिंदगी झांसों में पड़ गई है.



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