झारखंड सरकार घाटे में, पिछले एक साल में 5000 करोड़ बढ़ा कर्ज

* ऑडिटर जनरल की प्रेस वार्ता

* बढ़ रहा है सरकारी घाटा

* बढ़ रहा है सरकार के सर पर कर्ज़

Government deficit Loan Jharkhand governmentरांची : झारखंड सरकार के सर पर अभी 50 हजार 845 करोड़ का कर्ज है, और यह कर्ज बढ़ता ही जा रहा है. पिछले एक साल  में यह कर्ज़ 5000 करोड़ बढ़ गया है, यह खुलासा राज्य के ऑडिटर जनरल ने अपनी पत्रकार वार्ता में किया है.  ऑडिटर जनरल के मुताबिक पिछले  17 सालों से सरकारों ने बजट से ज्यादा 27 हजार करोड़ खर्च कर दिया है और पूरा हिसाब किताब भी नहीं दिया. एक रिपोर्ट

विधानसभा में ऑडिटर जनरल ऑफ झारखंड ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जिसमें सरकार के आमदनी और खर्च के साथ-साथ प्लानिंग में जबरदस्त कमी की ओर इशारा किया गया है. ऑडिटर जनरल ने सबसे बड़ी आपत्ती झारखंड गठन के बाद से लेकर अब तक की सभी सरकारों द्वारा बजट से ज्यादा खर्च किए जाने और उसका हिसाब समायोजित नहीं किए जाने का मामला सरकार की ध्यान में लाया है. लगभग 27000 करोड़ की राशि का समायोजन लंबित है.




ऑडिटर जनरल द्वारा की गई कुछ महत्वपूर्ण आपत्तियां इस तरह हैं

* झारखंड सरकार का प्राथमिक घाटा 1000 करोड़ से बढ़कर 6000 करोड़ तक पहुंच गया है विभागवार अगर बात करें तो

* पोलूशन बोर्ड की स्वीकृति से अधिक मात्रा में खनन करके कंपनियों ने सरकार को 213 करोड़ का चूना लगाया है

* 29400 करोड़ का उपयोगिता प्रमाण पत्र अभी तक लंबित है

* मेन पावर की कमी की वजह से टैक्स कलेक्शन में कमी आई है

महालेखाकार ने साफ किया कि वह सरकार के अकाउंटेंट की भूमिका निभाते हैं लिहाजा उन्होंने सरकार के लेखा जोखा में चल रही गड़बड़ियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया है और उन्होंने खुशी जताई कि सरकार ने उनकी सलाह को स्वीकार भी कर लिया है.





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