सरकार जनजातीय समुदाय की आबादी कम होने से चिंतित : नीलकंठ सिंह मुंडा

दुमका : ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा ने कहा कि सरकार जनजातीय समुदाय की आबादी कम होने से चिंतित है। सरकार ने इसके लिए एक समिति का भी गठन किया है जो इस दिशा में अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा कि इस गंभीर मुद्दे को लेकर जनजातीय परामर्शदातृ समिति की उपसमिति की बैठक की जा रही है। ताकि बैठक में प्राप्त सुझाव पर सरकार कार्य कर सके। मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा बुधवार को परिसदन दुमका में जनजातीय परामर्शदातृ समिति की उपसमिति की बैठक में बोल रहे थे। बैठक में जिले में जनजातीय समुदाय की आबादी में कमी होने के कारण पर विस्तृत रूप से चर्चा की गयी एवं विचार विमर्श किया गया।

टीएसी की उप समिति ने दिये कई निर्देश

बैठक में टीएसी की उप समिति ने संबंधित विभाग के अधिकारी को निर्देश दिया कि 1947 से अब तक की जनगणना विभाग से प्राप्त कर जनजातीय समुदाय के लोगों में कमी का पता लगाया जाए। साथ ही पूरे संथाल परगना प्रमंडल में जनजातीयवार कितनी जनसंख्या है इसे भी स्पष्ट किया जाए। कम उम्र में जनजाति समुदाय के लोगों की मृत्यु के कारणों पर भी अध्ययन की जरूरत है। बैठक में उपस्थित लोगों द्वारा बताया गया कि मुख्यतः शराब (हड़िया) के कारण कम उम्र में ही लोगों की मृत्यु हो जा रही है। प्रशासन और समाज सेवी संस्था को इस सम्बन्ध में लोगों को जागरुक करने की जरूरत है।

रोजगार के लिए साल में दो बार लोग करते हैं पलायन

मसानजोर डैम के निर्माण के दौरान अनुसूचित जनजाती के लोगों का बड़ी संख्या में विस्थापन हुआ था।  विस्थापन के उपरांत उन्हें कहां बसाया गया तथा उनसे सम्बन्धित अन्य आंकड़ों को निकालने का समिति ने संबंधित विभाग के लोगों को निर्देश दिया। बैठक में संबंधित विभाग द्वारा बताया गया कि 2001 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जनजाती 44.76 प्रतिशत थे, जबकि 2011 जनगणना के अनुसार 43.22 प्रतिशत हैं। बैठक में बताया गया कि अक्सर यहां के लोग वर्ष में 2 बार रोजगार के लिए दूसरे क्षेत्रों में पलायन कर जाते हैं। यहां के लोगों को कैसे उनके घर के आस-पास रोजगार उपलब्ध कराया जाय जिससे पलायन न हो इस पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई। बैठक में संबंधित विभाग के अधिकारियों ने बताया गया कि कुल 8200 पहाड़िया परिवारों को मुख्यमंत्री डाकिया योजना के तहत चावल का पैकेट उपलब्ध कराया जा रहा है। दुमका जिले के गोपीकान्दर, रामगढ़, काठीकुंड, शिकारीपाड़ा, जामा प्रखंड में अधिक संख्या में पहाड़िया समुदाय के लोग रहते हैं। प्रत्येक परिवार को 35 किलोग्राम चावल प्रति माह उपलब्ध कराया जा रहा है।




एक भी परिवार माइनिंग के कारण विस्थापित नहीं हुए : डीसी

मौके पर डीसी मुकेश कुमार ने बताया कि पिछले सात-आठ महीने से किसी प्रकार की माइनिंग लीज नहीं दी जा रही है। इससे एक भी परिवार माइनिंग के कारण विस्थापित नहीं हुए हैं। न्यूट्रीशन इस जिले की एक समस्या है, लेकिन जिला प्रशासन इस क्षेत्र में निरंतर कार्य कर रहा है। आईएफए टैबलेट लगातार वितरित किए जा रहे हैं। कई बार लोग आईएफए टैबलेट मिलने के बाद भी इसे नहीं खा रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन लोगों को जागरुक करने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि फूड हैबिट ठीक करने की जरूरत है। फूड हैबिट को बदलने की जरूरत है, किचन गार्डन को बढ़ावा देने का प्रयास जिला प्रशासन द्वारा किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन आदि लोगों को दिया जा रहा है। लेकिन कई बार विभाग द्वारा पैसा भेज देने के बाद भी बैंकों के द्वारा उन्हें ससमय पैसा नहीं मिल पाता है। कई बार बिचौलियों के सहयोग से लोग अपनी पेंशन की राशि को निकालते हैं, जिसके कारण बिचौलिए उनकी पेंशन की राशि से कुछ राशि को रख लेते हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों को निर्देश दिया जाए कि किसी प्रकार के बिचौलियों को बैंक में आने ना दें, साथ ही पेंशनधारियों को ससमय पैसा मिले इसे सुनिश्चित करें।

 





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