हाल-ए-रिम्स : पंद्रह हजार के चक्कर में पांच माह से यूरीन का थैला लटकाए भटक रहा मरीज

यूरिननिवेदिता बरनवाल

रांची : रिम्स की संवेदनहीनता का एक और किस्सा सामने आया है. पिछले 5 महीनों से यूरिन का पाइप (कैथेटर) लगा मरीज यूरोलॉजी विभाग का चक्कर काट रहा है. कांके क्षेत्र के रहने वाले 55 वर्षिय धुरवा लाल गोराई ने पिछले साल नवंबर में रिम्स में अपना इलाज करवाया था. वह यूरीन संबंधित बीमारी से परेशान था. पैसों की कमी की वजह से उसने अपना इलाज राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स में कराया उचित समझा. वह सितंबर 2017 में रिम्स आया. डॉक्टरों ने उसका इलाज भी किया. इलाज के बाद उसके गुप्तांग में कैथेटर (पेशाब का थैला) लगा दिया. जिससे कि उसे शौच के लिए बार-बार उठना न पड़े. पर इलाज के पांच महीने बीत जाने के बाद भी धुरवा लाल गोराई का कैथेटर अब तक नहीं निकाला गया है.




डॉक्टर ने कहा- पंद्रह हजार जमा करो, इलाज हो जाएगा

पीड़ित मरीज धुरवा गोराई का कहना है कि वह जब भी कैथेटर निकलवाने रिम्स के यूरोलोजी विभाग के डॉक्टर अरशद जमाल के पास जाता है वह उसे किसी न किसी बहाने बहला देते हैं. कैथेटर निकालने के बजाय महंगी-महंगी दवाईयां लिख देते हैं. जिन्हें खरीदने में वह असमर्थ हैं. वहीं गुरुवार को डॉक्टर अरशद जमाल ने मरीज धुरवा को जमशेदपुर जाकर इलाज कराने की सलाह दी. इस पर मरीज ने डॉक्टर से कहा कि वह काफी गरीब है. सड़क पर अंडा बेच कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता. जमशेदपुर जाकर इलाज करवाने के लिए वह लाख रुपये कहां से लाएगा. मरीज ने आगे बताया कि इस पर डॉक्टर जमाल ने धुरवा से पंद्रह हजार रुपये लाने को कहा. डॉ जमाल ने कहा कि तुम पंद्रह हजार रुपये जमा करो. पांच हजार रुपये जांच के लिए और दस हजार दवाईयों के लिए, फिर तुम्हारा इलाज होगा.

मरीज धुरवा गोराई का कहना है कि वह बहुत गरीब है. लोगों से पैसे मांग कर किसी तरह पांच हजार रुपये इकट्ठा कर पाया है. पर डॉक्टर उसका इलाज नहीं कर रहे हैं. कैथेटर के लगे होने से उसे काफी परेशानी हो रही है.





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