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भारत के लिए बड़ी समस्या बनी मानव तस्करी, नोटबंदी से हुआ थोड़ा कंट्रोल

human trafficking big problem in india मानव तस्करी को आम भाषा मे कबूतरबाज़ी भी कहा जाता है. इसे भले ही एक गैरकानूनी अपराध माना जाता है किन्तु फ़िर भी न केवल भारत मे बल्कि समूची दुनिया में यह समाज के लिये एक गम्भीर समस्या बनी हुई है.

 

ड्रग्स व हथियारो की तस्करी के बाद मानव तस्करी को दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा संगठित अपराध माना जाता है और अगर बात एशिया की हो तो भारत इस तरह के अपराधो का गढ माना जाता है.

 

संयुक्त राष्ट्र की परिभाषा के अनुसार किसी व्यक्ति को डरा कर बल प्रयोग कर अथवा दोषपूर्ण तरीके से भर्ती, परिवहन या शरण मे रखने की गतिविधि तस्करी की श्रेणी में आती है.

 

आपको बता दू की देह व्यापार से लेकर बन्धुवा मजदूरी तक के लिए मानव तस्करी की जाती है. एक रिपोर्ट के अनुसार करीब 80% मानव तस्करी जिस्मफ़रोसी के लिए की जाती है जबकि शेष 20% बंधुवा मजदूरी के लिए.




 

मानव तस्करी के मामलो मे अधिकान्स बच्चे भारत के पूर्वी इलाकों के बेहद गरीब व पिछडे इलाको से होते है. प्रायः मानव तस्करी जैसे घिनौने अपराध मे संलिप्त एजेन्ट गाँवो के बेहद गरीब परिवारो की कम उम्र की बच्चियो पर नजर रखते है और अवसर पाकर उनके परिजनो को कुछ रकम का लालच देकर लडकियो को शहर मे अथवा विदेशों में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेहतर जिंदगी के सपने दिखाकर उन्हे अनैतिक कार्यो मे धकेल देते है.

 

ऐसी बहुत सी लड़कियाँ घरेलू नौकर या बंधुआ मजदूर के रूप मे कार्य करने को विवश होती है जिनका हर प्रकार से शोषण किया जाता है तो बहुत सी अबोध लड़कियों को जिस्मफ़ारोशी के घिनौने धंधे मे भी धकेल दिया जाता है.

 

केन्द्र की मोदी सरकार का मानव तस्करी के खिलाफ कड़े कानून को बनाना एक सराहनीय कदम है. अब मानव तस्करी मे कम से कम 10 साल व अधिकतम उम्र कैद की व 1 लाख रुपये से अधिक सजा का प्रावधान किया गया है. और मानव तस्करी के मामलो मे जांच का जिम्मा भी N.I.A. (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) को सौपा गया है.



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