चतरा : अवैध रूप से चल रहा था जांच घर, अल्ट्रासाउंड मशीन जप्त, एक गिरफ्तार

Illegal clinics and ultrasound investigation homeचतरा : उपायुक्त जितेन्द्र कुमार सिंह के निर्देश पर झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा अवैध रूप से चलाये जा रहे क्लिनिक और अल्ट्रासाउंड जांच घरों पर जिला प्रशासन की गाज गिरनी शुरू हो गई है. इसी कड़ी में चतरा इटखोरी थाना क्षेत्र के धनखेरी चौक पर स्थित साहू भवन में अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड जांच घर को प्रखंड स्तरीय गठित प्रशासन की टीम ने शील कर दिया है. जांच टीम ने इटखोरी पुलिस की मदद से अल्ट्रासाउंड मशीन को जप्त कर लिया. साथ ही मौके पर मौजूद अल्ट्रासाउंड मशीन के ऑपरेटर छोटू कुमार को पुलिस गिरफ्तार कर थाना ले आई.

छापेमारी टीम का  नेतृत्व कर रहे इटखोरी अस्पताल के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. डीएन ठाकुर ने बताया कि जिला प्रशासन को लगातार इस बात की सुचना मिल रही थी कि जिले के सभी अलग-अलग बारह प्रखंडो मे झोलाछाप डॉक्टरों के द्वारा अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड जांच घर संचालित कर लोगो की जान से खिलवाड़ करने के साथ-साथ उनसे मोटी रकम वसूल रहे हैं.




गिरफ्तार  अल्ट्रासाउंड मशीन ऑपरेटर  छोटू कुमार प्रतापपुर प्रखंड के जोरी गांव का रहने वाला है. पुलिसिया पूछ-ताछ के क्रम मे उसने बताया कि अल्ट्रासाउंड जांचघर का मालिक बिहार राज्य के शोभ बाराचट्टी इलाके का रहने वाला रवि प्रजापति है. चिकित्सा पदाधिकारी डॉ डीएन ठाकुर ने कहा कि प्रखंड के विभिन्न चौक-चौराहों एवं गली-मुहल्लो में झोलाछाप डाक्टरों द्वारा चलाये जा रहे अवैध क्लिनिक एवं जांच घर को बंद करने में आम जनता प्रशासन का सहयोग करे, क्योंकि झोलाछाप डॉक्टर गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड मशीन के द्वारा जांच कर गर्भ में पल रहे नवजात लड़का है, या लड़की का झूठा रिपोर्ट देकर उनसे मुंह-मांगी रकम एंठते हैं.  उन्होंने आगे बताया कि इसमें संलिप्त आरोपियों के विरुद्ध पीसीपीएन डीटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जेल भेजा जायेगा.

गौरतलब है, कि आज से डेढ़ माह पूर्व लिंग परीक्षण रिपोर्ट को सही ठहराने के लिये एक झोलाछाप डॉक्टर द्वारा नवजात शिशु का लिंग काट दिया गया था. इस घटना को इटखोरी जयप्रकाश नगर मुहल्ला स्थित अवैध रूप से संचालित ओम क्लीनिक एवं चट्टी गांव में संचालित आस्था अल्ट्रासाउंड क्लीनिक के संचालक द्वारा अंजाम दिया गया था.  इस मामले के आरोपी डॉ. अनुज कुमार एवं डॉ. अरूण कुमार अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. जिला प्रशासन के लाख प्रयासों के वावजूद पुरे चतरा जिले में कुकुरमुत्ते की तरह अवैध नर्सिंग होम और जांच घर बे-रोक-टोक के चलाये जा रहे हैं.





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