आस्था का महापर्व छठ, स्वर्णरेखा नदी घाट पर व्रतियों ने दिया भगवान सूर्य को अर्घ्य

Jamshedpur Mahparva Chhath Faith Swarnarekha River Ghat Vratis gave Lord Sun Arghyaजमशेदपुर: आस्था का महापर्व छठ को लेकर अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्ध्य अर्पित करने के लिए लौहनगरी जमशेदपुर के नदी-तालाब और विभिन्न घाटों पर लाखों की संख्या में सूर्यदेव के उपासकों की भीड़ पहुंची. इस दौरान जिला प्रशासन और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों द्वारा शिविर लगाकर छठव्रतियों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किये गए थे.

जमशेदपुर में अस्ताचलगामी भगवान भुवन भास्कर को अर्घ्य देने के लिए लाखों की संख्या में लोग भक्ति-भाव से स्वर्णरेखा नदी घाट पर पहुंचे. सिर पर दउरा में पूजन सामग्री लिए छठी मइयां की गीत गाते छठव्रतियों के नदी-घाटों पर पहुंचने का सिलसिला दोपहर बाद से शुरू हो गया था. नदी के दोनों तटों पर दूर-दूर तक लाखों की संख्या में सूर्यदेव की उपासना करने और अस्ताचलगामी साक्षात भगवान सूर्य को अर्ध्य देने को लेकर श्रद्धालु जूट थे. लाख भीड़ होने के बावजूद आस्था का महापर्व छठ को लेकर यहां स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ख्याल रखा गया था. नदी के किनारे सुप और दउरा में टिमटिमाते दीये के बीच रखे पूजा की सामग्री पूरे वातावरण को भक्ति से सराबोर कर दे रहा था.




कई छठव्रती नदी घाटों तक दंडवत करते अर्घ्य देने पहुंचे. नदी में स्नान कर हाथ जोड़ सूर्यदेव की ध्यान में लीन छठव्रतियों की भक्ति देखते ही बन रही थी. हाथों में सुप में रखे परिक्रमा कर छठ व्रतियों ने सपरिवार डूबते भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया और विश्व कल्याण के साथ ही पूरे समाज और परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की कामना की. इधर पूर्व के वर्षों की तुलना में सूर्यदेव की पूजा करने को लेकर इस बार श्रद्धालुओं की तादाद भी काफी दिखी.

कई छठ व्रतियां निर्जला उपवास की हुई थी. छठ व्रतियों का कहना था कि साक्षात भगवान सूर्य ही ऐसे देव हैं जिनकी उपासना से सारी मनोकामना पूर्ण होती है. आस्था से जुड़े चार दिनों के इस महापर्व में पवित्रता का विशेष महत्व होता है. ऐसा सूर्य के उपासकों का मानना है.

आस्था का महान पर्व छठ को लेकर अस्ताचलगामी भगवार सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद छठ व्रतधारी भगवान भास्कर और छठी मइयां की ध्यान में लीन छठ की गीत गाती अपने घरों की ओर निकल पड़ीं. अब बुधवार को पुन ये सभी छठ व्रती पुन एक बार नदी घाटों पर अहले सुबह पहुंच का उदयीमान सूर्य को अर्घ्य दे कर विश्व और समाज कल्याण  के साथ अपने परिवार की खुशहाली की कामना करेंगी.





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