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खूंटी : जर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर बच्चे, अधिकारीयों को इसकी जानकारी तक नहीं

khunti Children forced study disgusting school officials do not know

khunti Children forced study disgusting school officials knowखूंटी : राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय डूमरदगा जहां 191 बेटियां और 181 बेटे अर्थात कुल 372 बच्चे पढ़ रहे हैं. सरकारी स्कूल जहां लगभग पौने चार सौ बच्चे पढ़ रहे हों और ऐसे सरकारी स्कूल जहां बेटों से ज्यादा बेटियों की संख्या है, लेकिन स्कूल की बिल्डिंग जर्जर और छत के लगातार टूटने से बेटियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े हो गए हैं. सरकार की महत्वकांक्षी योजना बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ इस स्कूल में सरकार को मुंह चिढ़ाती नजर आ रही है. बड़ी संख्या में यहां बेटियां पढ़ रही है लेकिन कहीं ना कहीं विद्यालय की दरकती दीवार और टूटते छत के कारण बेटों के साथ-साथ बेटियां भी महफ़ूज नहीं है.

यहां बेटियां शिक्षकों के भरोसे पढ़ाई तो कर रही हैं लेकिन टूट- टूट कर असमय गिरती छत पढ़ाई में बाधक बन रही है जबकि जिला शिक्षा अधिकारी इससे बेखबर हैं. लगातार होने वाली बारिश में छत से टपकते पानी बच्चों की किताब कॉपियों पर अपना मुहर भी लगा देती है. बरसात में शिक्षकों ने बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर एक क्लास रूम को पूरी तरह शिफ्ट कर दिया है. विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों की सुरक्षित पढ़ाई के लिए बिरहू पंचायत के मुखिया लगातार साढ़े तीन साल से जब से रघुवर सरकार सत्ता में आई है जिला प्रशासन को ज्ञापन देती रही है. बावजूद अब तक जिले में तीन उपायुक्त आये और चले गए,लेकिन ज्ञापन अब भी जिला प्रशासन की फाइलों में धूल फांक रही है. खाद्य मंत्री सरयू राय भी तत्कालीन उपायुक्त के साथ डूमरदगा के स्कूल पहुंचे थे और जमीनी हालात देखकर चिंता जताई थी लेकिन अब भी डुमरदगा राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय की जर्जर छत और दीवार का मालिक ऊपरवाला ही है.

अधिकारीयों को नहीं हैं जानकारीkhunti Children forced study disgusting school officials do know

डुमरदगा राजकीयकृत उत्क्रमित मध्य विद्यालय की जर्जर छत से बारिश के दौरान बच्चे पढ़ रहे हैं लेकिन जिले के अधिकारीयों को जानकारी तक नहीं. साथ ही दावा कर रहे हैं कि जिले में ऐसा स्कुल नहीं है. लेकिन सुचना मिलने पर मेंटेनेंस कर टूटे छत और दीवारों को ठीक कर दिया जायेगा. जबकि दूसरी तरफ क्लास में पढ़ रहे बच्चे और टूटे छत दीवारों में दरार इसके गवाह हैं.

सरकार की महत्वकांक्षी योजना बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ इस स्कूल में सरकार को मुंह चिढ़ाती भले ही नजर आ रही है हो,लेकिन इसका जिम्मेवार सम्बंधित अधिकारी है और शायद इंतज़ार किसी बड़ी घटना का हो रही हो, उसके बाद स्कुल का मरम्मत कार्य किया जाये. तीन वर्षों से लगातार स्थानीय जनप्रतिनिधियों के द्वारा अधिकारी से शिकायत के वावजूद भी स्कूल का मरम्मत न होना इसका उदहारण है.

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