कोयलांचल में करम पर्व की धूम, बहनें लेती हैं भाई की रक्षा का प्रण

धनबाद : कोयलांचल में करम पर्व की धूम गुरुवार को देखने को मिल रही है. धनबाद में अलग-अलग झुंडों में बहनें एकत्रित होकर अपने भाई की सलामती के लिए कर्मा नृत्य कर रही हैं. वहीं नौ दिनों तक चलने वाले इस प्रकृति पर्व करमा में अपने भाई की रक्षा का प्रण लेती हैं.

झारखण्ड में आदि काल से महिला सशक्तिकरण

हम आज महिला सशक्तिकरण की बात करते हैं, लेकिन 1999 से पहले दक्षिण बिहार और अब झारखंड जहां आदिकाल से ही महिला सशक्तिकरण का नजारा देखने को मिलता है. कर्मा एक ऐसा पर्व है जिसमे बहनें अपने भाई की रक्षा का प्रण लेती हैं. भाई-बहन के पर्व रक्षा बंधन से सभी परिचित हैं, मगर करमा पर्व भाई-बहन के प्रेम के एक अनूठे पहलू को उजागर करता है.




करम पेड़ और जावा की होती है पूजा

रक्षा बंधन में जहां भाई, बहन की रक्षा की प्रतिज्ञा करता है…वहीं करमा पर्व में बहनें, भाई की रक्षा का प्रण लेती हैं. करमा कृषि और प्रकृति से भी जुड़ा पर्व है, जिसे झारखंड के सभी समुदाय हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं. इस पर्व को भाई-बहन के निश्छल प्यार के रूप में भी जाना जाता है. भादो शुक्ल पक्ष की एकादशी को मुख्य पूजा होती है. झारखंडी पर्व-त्योहारों और सामाजिक-सांस्कृतिक उत्सवों में प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व आराधना एक अनिवार्य विधान है. करमा में करम डार (करम पेड़ की डाली) और जावा की पूजा होती है.

पाहन कराते हैं पूजा

दूसरे दिन सुबह भेलवा वृक्ष की टहनियों को धान के खेत में गाड़ दिया जाता है. माना जाता है कि इससे फसल में कीड़े नहीं लगते. झारखंड के सभी आदिवासी-मूलवासी समुदायों में करमा की विधियां एक ही तरह की होती है. आदिवासियों में करम की पूजा गांव के पाहन कराते हैं. वहीं यह पूजा ब्राह्मण पुरोहित द्वारा संपन्न होता है.





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