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लोस चुनाव में करारी हार के बाद अभी से ही विस चुनाव को लेकर रणनीति बनाने में जुटे विपक्षी दल

विपक्षी दल

रांची : तमाम सियासी बिसात बिछाने के बावजूद लोकसभा चुनाव के दंगल में महागठबंधन एनडीए के आगे पूरी तरह धाराशायी हो गया. महागठबंधन को मिली करारी शिकस्त के बाद अब विपक्ष के तमाम दल इस हार की समीक्षा की बात कर रहे हैं. साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नई रणनीति के तहत अभी से ही अपनी-अपनी सियासी जमीन मजबूत करने पर जोर देने की बात कही जा रही है.

महागठबंधन को मिली करारी शिकस्त ने महागठबंधन के साथियों को अब आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नए सिरे से सियासी समीकरण साधने पर मजबूर कर दिया है.

महागठबंधन के तमाम साथियों को इस बात का अहसास हो चला है कि मौजूदा रणनीति के तहत एनडीए को आगामी विधानसभा के चुनाव में शिकस्त देना बेहद मुश्किल है. लिहाजा रणनीति भी बदलनी होगी और अपनी अपनी सियासी जमीन को अभी से  सिंचना भी होगा. हालांकि महागठबंधन के तमाम साथी यह भी मान कर चल रहे हैं कि विधानसभा चुनाव का सियासी मिजाज अलग होगा.

महागठबंधन के तमाम साथी इस चुनाव में मिली करारी हार के बाद अब दलों के बीच मिले आपसी सहयोग की समीक्षा की भी बात कह रहे हैं. महागठबंधन के साथी कांग्रेस और झारखंड विकास मोर्चा की मानें तो राज्य में महागठबंधन देरी से बना. लिहाजा जमीनी स्तर पर दलों के कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल स्थापित नहीं हो पायी. कार्यकर्ताओं  के बीच तालमेल होता तो तस्वीर अलग होती. दलों के नेताओं के बीच चुनाव के आखिरी आखिरी वक्त तक इगो भी क्लैश होता रहा. सीट शेयरिंग को लेकर नेताओं के बीच मनमुटाव आखिरी दौर तक चला.

देश में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया दिल्ली में शुरू हो गई है. लेकिन सूबे के राजनीतिक दलों में जीत हार की विवेचना जारी है. दरअसल झारखंड में 6 महीने के भीतर विधानसभा के चुनाव होने हैं. लिहाजा लोकसभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त से सबक लेते हुए विपक्ष अभी से ही अपनी रणनीति बनाने में जुट गयी है. साथ ही अपने अपने स्तर से विपक्षी दल महागठबंधन के सियासी नफा नुकसान के आकलन में भी जुट गए हैं.

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