बालिका वधु बनने से बची दो बेटियां, परिजन जबरन कराना चाहते थे शादी

बाल विवाह से बची दो बेटियांरांची : हम 21वीं सदी में हैं. तेजी से हर कुछ बदल रहा है. हर तरफ विकास हो रहा है. लेकिन मानसिक विकास की रफ्तार काफी धीमी नजर आती है. बाल विवाह रोकथाम के लिए सरकार कई तरह के अभियान चला रही है, कोशिशें कर रही हैं. लेकिन लोग शायद समझते ही नहीं. दो मामले सामने आए हैं. एक पूर्वी सिंहभूम और एक सिमडेगा से. पूर्वी सिंहभूम के मुसाबनी प्रखंड के बेनाशोल में एक नाबालिग बालिका वधु बनने से बच गई. चाइल्ड लाइन की पहल पर मुसाबनी प्रशासन ने बेनाशोल पहुंच विवाह रोक दिय. नाबालिग उत्क्रमित उच्च विद्यालय बेनाशोल में वर्ग नौ की छात्रा है. बेनाशोल निवासी राकेश दास ने अपनी नाबालिग बेटी छाया रानी दास की शादी झाड़ग्राम में तय की थी. 18 जून सोमवार को शादी बेनाशोल में होनी थी. तभी चाइल्ड लाइन को जानकारी मिली, जिसके बाद शादी रोक दी गयी.




इसे भी पढ़ें : कश्मीर में PDP से अलग हुआ BJP, भाजपा ने कहा अगला CM हमारा होगा

सिमडेगा में 16 वर्षीय नाबालिग की परिजन करना चाहते हैं शादी

वहीं सिमडेगा जिले के गटीबांदू गांव में 16 साल की नाबालिग की परिवार वाले जबरन शादी कराना चाहते हैं. 29 जून को खूंटी जिले में शादी तय भी हो चुकी है. लेकिन बच्ची आगे पढ़ना चाहती हैं.

इसे भी पढ़ें :  हरीश रावत ने राहुल गांधी को बताया भारत का भविष्य

शादी से बचने के लिए घर से भागी थी नाबालिग

बालिका वधू बनने से बचने के ले नाबालिग घर से भागकर रांची पहुंची एक हफ्ते बाद गुमला थाने पहुंच अपनी कहानी बयान की. जिसके बाद मामले की जानकारी बाल कल्याण विभाग को दी गई और उसने बच्ची को अपनी शरण में लिया.

ये दोनों बच्चियां तो बालिका वधु बनने से बच गई, मगर हर दिन हमारे समाज की कई बेटियां बालिका वधु बन रही है. जिसकी सच्चाई तक सामने नहीं आ पाती है.





WhatsApp chat Live Chat