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चिट्ठी के बहाने की जा रही थी ब्लैकमेलिंग, विधायक खरीद मामले में मंत्री अमर बाउरी का नया खुलासा

– आठ महीने से चल रहा था ‘खेल’

– मुकदमे की दी चेतावनी

बोकारो : झारखंड विकास मोर्चा (झाविमो) छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में छह विधायकों के शामिल होने और झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी द्वारा इन विधायकों की कथित खरीद-फरोख्त का आरोप लगाए जाने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. इसी कड़ी में रविवार को एक नए व चौंकाने वाले तथ्य को राज्य सरकार के मंत्री अमर कुमार बाउरी ने उजागर किया. बोकारो में पत्रकारों से बातचीत के दौरान बाउरी ने कहा कि फर्जी चिट्ठी का यह खेल पिछले आठ महीने से चल रहा था. उन्हें भी फोन आया था कि मामला सलटा लीजिए, नहीं तो चिट्ठी को प्रकाशित कर दिया जाएगा. एक प्रकार से ब्लैक मेलिंग का खेल चल रहा था, लेकिन उन्होंने साफ तौर पर कह दिया था कि पहले उक्त चिट्ठी को सत्यापित किया जाए. इधर, झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने मनगढंत चिट्ठी बनाकर विधायकों की तथाकथित खरीद-फरोख्त के संदर्भ में पूर्ण रूप से निराधार आरोप लगाया है. यह उनकी हताशा और निराशा का परिचायक है.

सच्चाई तो यह है कि राहुल गांधी द्वारा नरेंद्र मोदी के खिलाफ एकजुट किए जा रहे विरोधी दल के नेताओं में अपनी पूछ नहीं होने के कारण, या यूं कहें कि कांग्रेस की इस उपेक्षा के कारण बाबूलाल हताशा में आ गए हैं. राहुल गांधी ने तमाम विरोधी दलों के नेताओं के साथ आयोजित ईद मिलन के कार्यक्रम में उन्हें पूछा तक नहीं था और इन सब बातों की खीझ बाबूलाल हम लोगों पर उतार रहे हैं. राजनीतिक स्तर की इतनी नीचता पर वह गिर जाएंगे, इसकी कल्पना भी उन्होंने नहीं की थी. भाजपा ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के भीतर उक्त आरोप को बाबूलाल सत्यापित करें अथवा माफी मांगें. ऐसा नहीं होने पर पार्टी कानूनी कार्रवाई करेगी और मुकदमा भी दायर किया जाएगा. उन्होंने कहा कि जब मामला न्यायाधिकरण में चल रहा है, न्यायालय में है तो इतने दिनों तक वे उक्त तथाकथित चिट्ठी पर खामोश क्यों रहें. अब अपनी पराजय की स्थिति देखकर वह हताश होकर ऐसे निराधार आरोप मढ रहे हैं.



बाबूलाल ने रखा था विलय का प्रस्ताव

एक सवाल के जवाब में मंत्री अमर बाउरी ने कहा कि भाजपा में विलय का प्रस्ताव बाबूलाल मरांडी ने ही विधायक दल की सबसे पहली बैठक में रखा था. इससे पहले वे भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिले थे, लेकिन किन कारणों से वे समय का इंतजार करते रह गए, वे ही जानें. परन्तु छह विधायको ने राज्यहित में समय का इंतजार नहीं किया और भाजपा में शामिल हो गए. दो तिहाई विधायकों ने एक साथ झाविमो छोड़कर केवल राज्य में अस्थायी सरकार के गठन और प्रदेश के विकास के उद्देश्य से भाजपा का दामन थामा था. 14 वर्षों के वनवास के बाद झारखंड को स्थायी सरकार के माध्यम से विकास की राह पर ले जाने के उद्देश्य से ही उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया था. उन्हें जनता का भरपूर समर्थन भी है और यही कारण है कि चंदनकियारी के विकास की महक आज देश-दुनिया में फैल रही है. वे लोग अगर ऐसा नहीं करते तो आज तक वे भी झाविमो घिसट रहे होते. दरअसल, बाबूलाल मरांडी की राजनीतिक अदूरदर्शिता के कारण ही झाविमो का पतन हुआ है. अब अपना राजनीतिक वजूद बचाने के लिए वह इस प्रकार का तथ्यहीन व आधारहीन आरोप लगाकर अपनी राजनीतिक नीचता का प्रमाण दे रहे हैं. इसकी जितनी भी निंदा की जाए, कम है.

बहस में आये विपक्ष, जनता को न करें परेशान

भूमि अधिग्रहण बिल को लेकर विपक्षी दलों के लगातार विरोध के संदर्भ में पूछे जाने पर मंत्री अमर बाउरी ने कहा कि विरोधियों के पास अब कोई मुद्दा नहीं रह गया है. विकास के मुद्दे पर दूर-दूर तक वे टिक नहीं पा रहे हैं, तो इस तरह का अनर्गल प्रलाप कर रहे हैं और आडंबर कर विरोधी माहौल बनाने में लगे हैं. राज्य के भू-राजस्व मंत्री अमर ने कहा कि भूमि अधिग्रहण बिल के केवल गैरपेसा क्षेत्र (नन शिड्यूल्ड एरिया) में ही सुधार किया गया है, जो केवल और केवल सरकारी विकास कार्यों से संबंधित है. पेसा क्षेत्र में (शेड्यूल एरिया) में किसी भी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया है. यह कांग्रेस के समय से ही चला आ रहा है. यह सही है कि झारखंड की जनता जल, जंगल और जमीन को लेकर संवेदनशील है, लेकिन विपक्षी दल के लोग इसी का नाजायज फायदा उठाकर ओछी राजनीति कर रहे हैं और झारखंड के विकास को रोकना चाह रहे हैं. उन्हें चुनौती देते हुए मंत्री ने कहा कि विपक्ष सदन में बहस में आये, न कि जनता को तंग करें. सरकार ने आज तक एक छंटाक जमीन भी जबरन नहीं ली है. प्रेसवार्ता में मंत्री अमर बाउरी के साथ मुख्य रूप से भाजपा के जिला अध्यक्ष जगरनाथ राम, मंत्री प्रतिनिधि जयदेव देव राय सहित वीरभद्र सिंह, अश्विनी कुमार झा, कुमार अमित आदि मौजूद थे.



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