खानाबदोश की तरह दिन गुजार रहे जीते हुए भाजपा जनप्रतिनिधि, टीएमसी के आतंक से बोकारो में ली शरण

बोकारो : पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार किस कदर ममताहीन हो गयी है, इसकी एक और बानगी सामने आई है. वहां भाजपाइयों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमले व हत्या की घटनाओं को लेकर जीते हुए भाजपा जनप्रतिनिधियों में भी खासा खौफ देखा जा रहा है. इसी खौफ से सांसत में पड़े विभिन्न अंचलों के दर्जनों पंचायत जनप्रतिनिधियों ने बंगाल से भागकर बोकारो में शरण ले रखी है. इनमें 22 महिला जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं.

टीएमसी कार्यकर्ता बने दुश्‍मन

उक्त सभी पश्चिम बंगाल के मालदा जिले के पंचायत जनप्रतिनिधि बताए जा रहे हैं. बीवी-बच्चा व अन्य परिजनों सहित कुल मिलाकर लगभग 50 की संख्या में ये लोग यहां विगत दो दिनों से खानाबदोश सी जिंदगी बिता रहे हैं. बताया जाता है कि इन्हें आगामी 10 अगस्त को शपथ लेनी है. आरोप है कि इनके जीतने के बाद से ही टीएमसी के कार्यकर्ता इनकी जान के दुश्मन बने हुए हैं. इस हालत में सभी जान बचाकर सुरक्षित बोकारो भाग आए हैं.

भाजपा नेता पर टीएमसी कार्यकर्ता कर रहे अत्याचार

पश्चिम बंगाल के मालदा जिले से भागकर बोकारो के एक स्कूल में शरण लेने को विवश ये महिला-पुरुष जनप्रतिनिधि संविधान के तहत निर्वाचित सदस्य हैं. इनका कसूर मात्र यह है कि इन्होंने तृणमूल कांग्रेस की कथित गुंडई के खिलाफ उबल रही जनता के वोट से जीत हासिल की है. बताया जाता है कि इनका जनप्रतिनिधि बनना ही इनका कसूर हो गया और तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ उनके इशारे पर झूठा मुकदमा दर्ज कर जेल भेज देने वाली पुलिस की आंखों की किरकिरी बन गए हैं. चुनाव जीतने के बाद इन्हें इस कदर गुंडों का आतंक का सामना करना पड़ा सुरक्षा के लिए इन्हें अपना इलाका छोड़ अन्यत्र शरण लेने को विवश होना पड़ा है.

दहशत में दफन हुईं चुनाव जीतने की खुशियां

वे लोग यहां एक स्कूल में ही डेरा जमाए हुए हैं. वहीं रहना, सोना, खाना, पीना, नहाना सब हो रहा है. घर वाले भी साथ हैं, पास है नहीं तो बस सुकून. अपना घर-द्वार छोड़कर इन्हें खानाबदोश का जीवन बिताना पड़ रहा है. एक तरफ चुनाव जीतने की खुशी थी, लेकिन दहशत में ये खुशियां जमींदोज होकर रह गयीं हैं. बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, सामान्य जीवन सब तबाह होकर रह गया है. इनका कहना है कि सबका हमदर्द बनने का ढोंग रचकर सत्ता में सात साल से कायम टीएमसी गुंडों के सहारे तथाकथित दर्द बांटने लगी है. ऐसे में अन्य भाजपा कार्यकर्ताओं की तरह वे लोग भी कहीं अकाल मौत का शिकार न बन जाएं, इसमें कोई आश्चर्य नहीं.




टीएमसी कार्यकर्ता दे रहे मारने की धमकी

कई महिला शरणार्थियों ने कहा कि उनलोगों को टीएमसी वाले लगातार उठा लेने और मारने की धमकी दे रहे हैं. एक महिला जनप्रतिनिधि ने बताया कि चुनाव जीतने के बाद उनलोगों को टीएमसी वाले बोर्ड तक गठित नहीं करने दे रहे हैं और धमकी दे रहे हैं. कई लोगों को झूठे मुकदमे में जेल भेज दिया गया है. यही वजह है कि उन्हें वहां से भयवश जान बचाकर भागना पड़ा है. उन्होंने कहा कि ममता सरकार को अगले चुनाव में अब जनता करारा जवाब देगी.

उठा लेने की देते हैं धमकी : राय

मालदा एक पंचायत प्रतिनिधि नवरोत्तम राय ने मंगलवार को मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि वहां ममता सरकार ने टीएमसी के कार्यकर्ता चुनाव हारने के बावजूद उनलोगों पर लगातार अत्याचार करते हैं. मारपीट होती ही रहती है. इतना ही नहीं, बार-बार उन्हें या उनके परिजनों को उठा लेने की धमकियां देते रहते हैं. इसके कारण वे लोग काफी डरे हुए हैं. नवरोत्तम ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ममता सरकार के अत्याचार को जानती है. उनकी मांग है कि केंद्र सरकार उनकी सुरक्षा की व्यवस्था करे, ताकि वे लोग निर्भीक होकर सुकून से अपने परिवार वालों के साथ रह सकें.

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हाथ आ गए तो वो मार डालेंगे : बास्के

एक अन्य विजयी अंचल भाजपा जनप्रतिनिधि पी. बास्के ने पत्रकारों को बताया कि ममता बनर्जी के कार्यकर्ता उनके पीछे हाथ धोकर पड़े हैं. उन्हें पूरा डर है कि वे लोग उन्हें जान से मार डालेंगे. बहुत से अंचलों में भाजपा के प्रतिनिधि अधिक संख्या में विजयी हुए हैं. यही वजह है कि वे लोग अपने शहर से, अपने इलाके से भागते फिर रहे हैं. इसके पूर्व उन्होंने बूथ गठन को लेकर साहेबगंज में भी शरण ली थी और अब बोकारो में आकर बीवी बच्चों के साथ शरण लेनी पड़ी है.





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