मध्य विद्यालय महाल में पुराने रसोइया ने बनाया खाना तो अपने बच्‍चों को घर ले गये अभिभावक

हंगामाचंदनकियारी (बोकारो) :  चंदनकियारी प्रखंड के मध्य विद्यालय महाल में 3 महीने बाद पुनः प्रखंड विकास पदाधिकारी के निर्देश पर विवादों के बीच पुराने रसोइयों के द्वारा मिड-डे-मील शुरू किया गया. वहीं पुराने रसोईया द्वारा खाना बनाने की सूचना पर कुछ बच्चों के अभिभावकों ने स्‍कूल पहुंचकर हंगामा किया और कुछ अभिभावक अपने बच्चे को लेकर घर चले गये. अभिभावकों का कहना है कि यदि पुराने रसोइयों द्वारा खाना बनाया जा रहा है तो हमारे बच्चे स्कूल में नहीं पढ़ेंगे. उनलोगों का कहना है कि अन्‍य जाति द्वारा बनाया गया खाना हमारे बच्‍चे नहीं खायेंगे.

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दिसंबर से स्‍कूल में बंद है मिड-डे-मील

मालूम हो कि मध्य विद्यालय महाल में अगले साल दिसंबर में दीवार गिरने से छात्रा की मौत के बाद, नए माता समिति का गठन किया गया. गठन होने के बाद ही पुराने एवं नए माता समिति की गंदी राजनीति के कारण मिड-डे-मील  बंद हो गया. परिणाम स्वरूप  यहां के बच्चों को हर दिन बिना मिड-डे-मील  के विद्यालय में पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ा. इस कारण बीस प्रतिशत बच्चों की उपस्थिति भी कम हो गई.

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नये रसोइया को भी डरा-धमकाकर भगा दिया

3 महीने बाद प्रशासन हरकत में आया. बीडीओ ने नए-पुराने माता समिति को छोड़कर तीसरा विकल्प निकाला और बाहर से तीन रसोइया को खाना बनाने के लिए रखा गया. परंतु फिर से कुछ उपद्रवी स्कूल में जाकर रसोइयों को धमकाकर और मारने का धमकी देकर भगा दिया. फिर से स्कूल में मध्यान्ह भोजन बंद हो गया.
पुनः प्रखंड विकास पदाधिकारी रवीन्‍द्र गुप्ता ने  3 महीने के बाद सख्त  निर्देश जारी करते हुये मिड-डे-मील  शुरू करने का निर्देश दिया. उन्‍होंने क‍हा कि यदि इस बार कोई भी पुराने रसोइया को डराने धमकाने की कोशिश की या स्‍कूल के अंदर हंगामा किया तो उसपर कार्रवाई की जायेगी. पर कुछ ग्रामीण बहकावे में आकर मिड-डे-मील  शुरू होते ही स्‍कूल में हंगामा शुरू कर दिया. इस बार भी स्कूल के प्रिंसिपल एवं प्रखंड विकास पदाधिकारी आदेश तक ही सीमित रह गए. परिणाम यह हुआ कि रसोईया ने तो खाना बनाया पर 90% बच्‍चों को अभिभावक स्‍कूल से घर वापस ले गये.

घटना के बाद भी स्‍कूल के शिक्षक एवं पदाधिकारी मौन

इस घटना के बाद भी स्‍कूल के शिक्षक एवं पदाधिकारी मौन रह गये. पदाधिकारियों और शिक्षकों के मौन ने दोनों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा कर दिया है. क्‍या मिड-डे-मील जातिवाद की भेंट चढ़ जाएगा. स्कूल राजनीति का अखाड़ा बना रहेगा. इस मामले में जनप्रतिनिधि भी सवालों के घेरे में हैं. उनकी भी कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं. चर्चा है कि ये लोग भी अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने में जुटे हैं. जिसका खामियाजा स्‍कूली बच्‍चों को भुगतना पड़ रहा है.
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