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एफसीआई के गोदाम में सड़ा लाखों टन अनाज, अधिकारी पर लापरवाही का आरोप

कोडरमा : झारखण्ड का दुर्भाग्य कहें या विडम्बना. सवाल सिर्फ भूख से मौत का नहीं बल्कि गोदाम में अनाज सड़ने तक का है. जहां एक ओर झारखण्ड की बेटी संतोषी की मौत भात-भात करते हुए भूख से हो जाती है. वहीं सरकार के अपने गोदामों में अनाज कई सालों से रखे-रखे सड़ जाता है.

ताजा मामला कोडरमा जिले के जयनगर प्रखंड एसएफसी गोदाम का है जहां लगभग 200 क्विंटल से अधिक अनाज रख-रखाव का सही तरीका नहीं होने के कारण सड़ गया. शुक्रवार को जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी भी जब जयनगर प्रखंड एसएफसी गोदाम पहुंचे तो उन्होंने भी पाया कि गोदाम में रखे चावल खाने योग्य नहीं है. लेकिन वह भी सड़े हुए चावलों को लेकर पूछे गए सवाल से बचते हुए नजर आए. वहीं  एजीएम विनोद कुमार एवं एमओ रमन कुमार सिंह के अड़ियल रवैया के कारण ही अनाज (चावल) सड़ गया है जो अब खाने लायक नहीं बचा है.

जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी ने ये कहा

जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी से बोरे में भरकर रखे गए सड़े हुए अनाज (चावलों) के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि जब कोई बोरा गिरकर फट जाता है तो जो चावल बढ़िया होता है उसे फिर दोबारा बोरे में भर दिया जाता है जो चावल खराब हो गया वह एजीएम के द्वारा रिपोर्ट करने के बाद विभाग के द्वारा जैसा निर्देश होगा विधिवत कार्रवाई की जाएगी. गोदाम में 2 वर्षों से रखे गए अनाज के सड़ जाने पर खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी ने कहा अभी मौजूदा एजीएम के द्वारा लापरवाही बरती गई है या पूर्व में जो एजीएम थे उनके द्वारा लापरवाही बरती गई है लेकिन एजीएम विनोद कुमार को निर्देश दिया गया है जो अच्छे चावल हैं उन्हें फ्रेश करके ही दिया जा सकता है. केवल उनका ही वितरण करेंगे जो उपयोग में लाने लायक है. उनका वितरण नहीं करेंगे जो खाने लायक नहीं है. एसएफसी गोदाम में कई बोरे से  अनाज के गायब होने की बात पर जिला खाद्य आपूर्ति पदाधिकारी ने कहा कि हमें इस बात की जानकारी नहीं है आपके द्वारा जानकारी दी गई है इस पर स्टॉक वेरिफिकेशन किया जाएगा.

उचित प्रबंध के अभाव में बर्बाद हो जाता है अनाज

देखने वाली बात है की ज़हां एक ओर देश में खाद्य सुरक्षा क़ानून लागू है. जिसके तहत भुखमरी, कुपोषण और खाद्य असुरक्षा के लिए सरकार को ज़िम्मेदार माना गया है फिर भी देश में हर साल लाखों टन अनाज सिर्फ भंडारण के उचित प्रबंध के अभाव में बर्बाद हो जाता है. कितनी बड़ी विडंबना है कि सरकार अनाज को तो सड़ने देती है दूसरी ओर यह कहती है कि अनाज की कमी है. लिहाज़ा वह गरीब जनता को मुफ़्त में अनाज नहीं उपलब्ध करा सकती.

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