रांची: विदेशों तक है निर्मल ह्रदय संस्थान का कनेक्शन, आया करोड़ों का फंड

missionary house nirmal hriday international funding रांची: राजधानी रांची में मदर टेरेसा द्वारा शुरू किये गये निर्मल ह्रदय का मकसद था कुंवारी गर्भवती महिलाओं की सुरक्षित डिलीवरी करवाना. लेकिन क्या पता था कि इस नेक काम की आड़ में बच्चों की खरीद-फरोख्त का बिजनेस खोल दिया जाएगा. जब से बच्चों की सौदेबाजी में निर्मल ह्रदय का नाम सामने आया है, तबसे हर दिन एक नया खुलासा हो रहा है.

अब इस संस्थान का विदेशी कनेक्शन सामने आया है. कहा जा रहा है कि इस संस्थान को विदेशों से करोड़ों रुपए मिलते आए हैं. इसका कभी जिक्र नहीं किया गया.

बता दें कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संचालित ‘निर्मल हृदय’ व ‘शिशु भवन’ आश्रम से बच्चों की बिक्री का खेल नया नहीं है. ये मामला 2014-15 में ही सामने आया था. इसकी जांच दबाने के पीछे बच्चों के सौदे का मकसद था. इस खेल में तत्कालीन ब्यूरोक्रेट्स और सफेदपोशों ने गिरोह बनाकर जांच को दबा दिया. इस मुद्दे को उठाने वाले बाल कल्याण समिति के तत्कालीन अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह को बर्खास्त कर दिया गया था.




‘निर्मल हृदय’ आश्रम को बच्चों का प्रोडक्शन हाउस बना दिया गया. ओमप्रकाश के खिलाफ कार्रवाई के लिए अधिकारियों ने उनसे पक्ष लेना भी जरूरी नहीं समझा था. इस कार्रवाई के बाद व्यापक पैमाने से बच्चों की सौदेबाजी का खेल शुरू कर दिया गया. सैकड़ों बच्चों का जन्म हुआ, जिनका कोई अता-पता नहीं है. तीन वर्ष की फाइलों के अनुसार जन्मे 280 बच्चों की कोई जानकारी सीडब्ल्यूसी को नहीं दी गई. माना जा रहा है कि सभी बच्चों को बेच दिया गया है. वे बच्चे किस हाल में कहा हैं, यह कोई नहीं जानता.

फाइलें देखते हुए सीडब्ल्यूसी और पुलिस ने पूरे प्रकरण को खंगालना शुरू कर दिया है. सीआइडी ने भी इसकी फाइल सीडब्ल्यूसी से मांगी है. अब देखना है कि ब्यूरोक्रेट्स की भूमिका सामने आने के बाद जांच की दिशा क्या रहती है?





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