बच्चों को बेचने का अड्डा निकला ‘निर्मल ह्रदय’, 280 बच्चों का नहीं कोई ठिकाना

missionary organisation big  business human trafficking रांची: सेंट मदर टेरेसा अगर आज कहीं होंगी, तो निर्मल ह्रदय संस्थान के काले कारनामे देख काफी दुखी हो गई होंगी. ईस्ट जेल रोड में बना मिशनरीज ऑफ चैरिटी द्वारा संचालित निर्मल ह्रदय में बच्चों की खरोद-फरोख्त का बड़ा मामला सामने आया है. एक दो बच्चों के केस से आगे बढ़ते हुए अब मामला 280 बच्चों तक पहुंच गया है.

यहां ये खेल काफी लंबे समय से चल रहा था. साल 2015 से 2018 तक यहां करीब 450 प्रेग्नेंट महिलाएं थी, लेकिन इनमें से सिर्फ 170 की डिलीवरी की रिपोर्ट ही मौजूद है. 280 बच्चों का कोई नामो निशान है.

मिशनरीज ऑफ चैरिटी की आड़ में नवजात का सौदा वर्षो से हो रहा है. इस मामले में खुफिया विभाग पूर्व में भी सरकार को रिपोर्ट देता आया है. जनवरी 2016 में मिशनरीज ऑफ चैरिटी की निर्मल हृदय रांची में 108 गर्भवती महिलाएं थीं. बाद में बाल कल्याण समिति ने जांच में पाया कि इनमें से दस बच्चों का ही जन्म दिखाया गया. जबकि 98 के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई.




अब इसी संस्था द्वारा बच्चे बेचे जाने की खबर सामने आने के बाद पूरे प्रदेश में पुलिस कारगर कार्रवाई की तैयारी है. खुफिया विभाग की ताजा रिपोर्ट में यह आशंका जताई गई है कि झारखंड के नवजात बच्चों को इन संस्थाओं के माध्यम से विदेश में सौदा और इन बच्चों के धर्मातरण से इन्कार नहीं किया जा सकता है.

रिपोर्ट की मानें तो आंध्र प्रदेश में भी इस तरह का मामला सामने आया था, जिसमें बहुत सी संस्थाओं के माध्यम से बच्चों की खरीद-बिक्री की बात सामने आई थी. आंध्र प्रदेश सरकार ने इस मामले में सीबीआइ जांच की अनुशंसा की थी. वर्तमान में यह भी जानकारी मिली है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने झारखंड के नवजात बच्चों को अवैध तरीके से झारखंड से कोलकाता, केरल, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की मिशनरी संस्थाओं में फादर, सिस्टर और नन बनाने के लिए भेजा है.





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