राहुल की कैलाश मानसरोवर यात्रा का नहीं मिला कोई आवेदन : विदेश मंत्रालय

नयी दिल्ली : विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को यह स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से चीन स्थित कैलास मानसरोवर की तीर्थयात्रा के संबंध में उसे कोई औपचारिक पत्र या आवेदन नहीं मिला है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि हमारी कोई इच्छा किसी की कैलास मानसरोवर यात्रा को रोकना नहीं है. राहुल गांधी की ओर से चीन के तिब्बत स्वायत्तशासी क्षेत्र की यात्रा के लिए अभी तक कोई औपचारिक पत्र या आवेदन नहीं मिला है.

राहुल ने जनसभा में किया था यात्रा का ऐलान

दरअसल, राहुल के कार्यालय से ऐसे किसी यात्रा की कोई पुष्टि नहीं की गई थी और न ही राहुल गांधी की ओर से इस यात्रा के लिए कोई आवेदन किया गया है. आपको बता दें कि कर्नाटक चुनाव के दौरान हुए हेलिकॉप्टर हादसे के बाद उन्होंने 29 अप्रैल को दिल्ली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा था कि जब हेलीकॉप्टर में गड़बड़ी हुई थी तो उनके मन में ख्याल आया था कि उन्हें कैलाश मानसरोवर यात्रा करनी चाहिए. उन्होंने उस वक्त अपने कार्यकर्ताओं से कर्नाटक चुनाव के बाद 15 दिन की छुट्टी मांगी थी ताकि वे अपनी कैलाश यात्रा कर सकें.




हर साल जून से सितंबर के बीच इस यात्रा का होता है आयोजन

भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से हर साल जून से सितंबर के बीच इस यात्रा का आयोजन होता है. तीर्थ यात्री जिस कैलाश पर्वत का दर्शन करने जाते हैं, वो तिब्बत में हैं. जहां चीनी प्रशासन की अनुमति के बिना जाना संभव नहीं है. उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होने वाली यात्रा में लगभग 24 दिन जबकि नाथुला दर्रे से होने वाली यात्रा में 21 दिन का वक्त लगता है. कैलाश मानसरोवर यात्रा 2 रूट के जरिए होती है. एक रूट उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा है जबकि दूसरा रूट सिक्किम का नाथुला दर्रा. बीते साल 2017 में नाथुला दर्रे बंद था जिसके चलते यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था. लेकिन इस बार विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने नाथुला दर्रे के खुले होने की जानकारी दी.



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