घाटशिला के मुसाबनी बस स्टैंड में शेड तक नहीं, पेड़ के नीचे बैठ कड़ी धूप में यात्री करते हैं बस का इंतजार

कन्हैया हेम्ब्रम

घाटशिला : मुसाबनी बस स्टैंड घाटशिला अनुमंडल का सबसे बड़ा बस स्टैंड है। यहां से प्रतिदिन 50 से अधिक लंबी दूरी की बस विभिन्न स्थानों के लिए प्रस्थान करती है। यह बस स्टैंड ओडिशा को भी मुसाबनी से जोड़ता है। यहां से ओडिशा, बंगाल, चाईबासा, जमशेदपुर सहित अन्य जगहों के लिए कई बसें चलती हैं। मुसाबनी बस स्टैंड में प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्रियों का आना-जाना होता है। यात्रियों की सुविधा के नाम पर बस स्टैंड में कुछ भी नहीं है।

शौचालय नहीं होने की वजह से महिला यात्रियों को होती है परेशानी

यात्रियों के बैठने के लिए यात्री शेड की भी व्यवस्था नहीं है। मजबूरन बस पकड़ने के लिए यात्रियों को पेड़ के नीचे बैठना पड़ता है। महिलाओं के लिए शौचालय की व्यवस्था नहीं होने के कारण महिला यात्रियों को काफी परेशानी होती है। स्टैंड में पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है। पानी पीने के लिए भी यात्रियों को आस-पास के होटलों का सहारा लेना पड़ता है। मुसाबनी बस स्टैंड से चार प्रखंड गुड़ाबंदा, डुमरिया, मुसाबनी एवं धालभूमगढ़ क्षेत्र के यात्रियों का आना-जाना रोज होता है। इसी बस पड़ाव से तकरीबन 60 से 70 मालवाहक ऑटो वाहनों का भी परिचालन होता है। परन्तु इतना बड़ा बस पड़ाव होने के बावजूद यहां यात्री सुविधा नदारद है। इस बस पड़ाव से सरकार को सालाना लाखों रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। यात्री सुविधा के नाम पर एक रुपया भी खर्च नहीं की जाती हैं।




सुविधा के नाम पर है सिर्फ एक
हाईमास्ट लाइट

जिला परिषद की पहल पर एक शौचालय बनाया भी गया तो लोगों का कहना है कि ये शौचालय ऐसी जगह बनाया गया है कि उसका इस्तेमाल करने के लिए मुख्य बस पड़ाव से दूर जाना पड़ता है। खासकर महिलाओं को काफी असुविधा होती है। सुविधा के नाम पर सांसद विद्युत वरण महतो द्वारा लगाया गया हाईमास्ट लाइट है, जिससे रात को ये बस पड़ाव रोशनी से चकाचक जरूर रहता है।

मुख्य द्वार भी अब तक है अधूरा

पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार बलमुचू द्वारा बस पड़ाव में बनाए जा रहे विशाल मुख्य द्वार आज भी अधूरा है। बस पड़ाव को सुंदर बनाने या साफ सफाई कराने का प्रयास भी किया गया है। कुछ माह पहले ही मुसाबनी के बीडीओ संतोष गुप्ता, सीओ साधुचरण देवगम, डीएसपी अजित कुमार बिमल और थाना प्रभारी सुरेश लिंडा ने काफी प्रयास कर पूरे बस पड़ाव को अतिक्रमण मुक्त व सफाई अभियान चलाकर साफ कराया था। यह सराहनीय कदम था। बस अब लोंगो को इंतजार है इतने बड़े बस पड़ाव में मूलभूत सुविधाओं का।





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