पीएम का विरोध करना आप के कई विधायक उम्‍मीदवारों को पड़ा महंगा, सजा हुई तो नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

न्‍यू दिल्‍ली : आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं को पीएम मोदी का विरोध करना महंगा पड़ा. आम आदमी पार्टी की छत्तीसगढ़ यूनिट ने झूठे आरोप में पार्टी के 14 नेताओं को गिरफ्तार करने का आरोप लगाया है. पार्टी की मानें तो उनके नेता 14 जून को रायपुर एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने पहुंचे थे, जहां पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. गिरफ्तार नेताओं में दो को बीते बुधवार को जमानत दे दी गई है, जबकि अन्य को न्यायिक हिरासत में रखा गया है. गिरफ्तार नेताओं में सात विधानसभा चुनाव में पार्टी के उम्‍मीदवार हैं. छत्तीसगढ़ में इस साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. विधानसभा चुनाव में रायपुर देहात से AAP उम्मीदवार और राज्य में पार्टी प्रमुख संकेत ठाकुर को भी हिरासत में रखा गया है.

मालूम हो कि रायपुर के सेशन कोर्ट में सभी 12 नेताओं की जमानत पर सुनवाई 25 जून को होगी. आप कार्यकर्ता रजनीश अवसथी की मानें तो आप नेताओं के साथ अपराधियों जैसा व्‍यवहार किया जा रहा है. मामले को लेकर पार्टी के शिष्ठमंडल ने दिल्ली में मुख्यमंत्री से मुलाकात की है. वहीं पार्टी नेता सोनी सूरी ने कहा है कि आप नेताओं को नहीं छोड़ा गया तो वह अनशन करेंगे.

आप नेताओं ने रायपुर एयरपोर्ट पर किया था हंगामा : इंस्पेक्टर जितेंद्र तामरकर

माना थाना के इंस्पेक्टर जितेंद्र तामरकर की मानें तो आप नेताओं ने रायपुर एयरपोर्ट पर हंगामा शुरू कर दिया था. सभी प्रधानमंत्री से मिलकर शिकायतों की लिस्‍ट सौंपने की तैयारी में थे. जिसके बाद सभी को गिरफ्तार कर लिया गया. इंस्पेक्टर जितेंद्र को ही पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक आप नेताओं की गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ धारा 151 के तहत मामला दर्ज किया गया है. घटना के तीन दिन बाद दंगा फैलाने, सार्वजनिक अधिकारियों के काम में बाधा डालना और भेष बदलने के आरोप में केस दर्ज किया गया.

सरकारी काम में बाधा डालने के कारण आरोपियों पर लगा अतिरिक्‍त चार्ज

माना थाना के इंस्‍पेक्‍टर की मानें तो आरोपियों के खिलाफ अतिरिक्‍त चार्ज सरकारी काम में बाधा डालने के कारण लगाये गये. मामले में रायपुर के आप कार्यकर्ता रजनीश अवस्‍थी ने बताया कि यह एक राजनीतिक आंदोलन था और इसके लिए जो धाराएं लगाई गईं है, वो इस मामले में लागू नहीं होती है. जो धाराएं लगाई गई है, उनके लिए दो साल तक की सजा हो सकती है. इससे चुनाव में उम्मीदवार अयोग्य घोषित हो जाएंगे.



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