बदहाल रिम्स का हाल, जमीन पर गद्दा बिछा लोगों का इलाज

patient admitted on floor in rims रांची: राजधानी रिम्स को भले ही गरीबों के बेहतर स्वास्थ्य सेवा के लिए बनाया गया था लेकिन उसके हालात देख लगता है कि सुविधाजनक कम, तकलीफदेह ज्यादा है. बढ़ती मरीजों की संख्या के कारण प्रशासन परेशान है. 25 अप्रैल को डॉ. जेके मित्र की यूनिट में मरीजों को जमीन पर गद्दा लगाकर इलाज कराते देखकर स्वास्थ्य विभाग की प्रधान सचिव निधि खरे नाराज हो गई थीं.

उन्होंने पूछा था कि जब गद्दा लग सकता है, तो बेड क्यों नहीं? तब प्रबंधन को एक घंटा के अंदर बेड लगाने का निर्देश दिया था. दूसरी ओर डेढ़ माह के बाद भी समस्या का निदान नहीं हो पाया है. मरीजों की संख्या ज्यादा होने के कारण कई मरीजों का इलाज जमीन पर गद्दा लगाकर फिर से किया जाने लगा है.




बेड की संख्या कम होने के कारण यूनिट की गली वाले हिस्से में भी बेड लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है. नर्सो ने बताया कि पहले यूनिट में बेड की संख्या 36 थी, जिसे निर्देश के बाद बढ़ाकर 48 किया गया. सचिव निधि खरे के निरीक्षण के बाद इसकी संख्या 58 की गई. सोमवार की रात में ही 50 से ज्यादा मरीज भर्ती किए गए, जिसके बाद बेड की संख्या कम होने के कारण बचे मरीजों का जमीन पर गद्दा लगाकर इलाज कराया जा रहा है.

बालूमाथ से आई कांति देवी सर्पदंश के बाद में भर्ती हुई है और बेड नहीं मिलने से परेशान दिखीं. ऐसे ही बुंडू की राधिका देवी का शुगर का इलाज जमीन पर गद्दा बिछाकर किया जा रहा है. रिम्स के डिप्टी सुपरिंटेंडेंट का कहना है कि रिम्स पर मरीजों का दबाव है. उनका इलाज हमारा दायित्व है. हम इस जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते. बेड की संख्या कम होने के कारण जमीन पर गद्दा बिछाकर उनके इलाज की व्यवस्था की गई है.





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