पानी की एक-एक बूंद के लिए मोहताज चास के लोग, नींद को कुर्बान कर रात भर करते हैं पानी का इंतजार

Surendra Prasad

Bokaro : पानी की समस्या और चास के लोगों का चोली-दामन का साथ है। बोकारो के उपशहर चास की स्थिति आज भी नहीं सुधर सकी है। चास जलापूर्ति योजना का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाने के कारण आज भी नलों के पास सैकड़ों लोग अहले सुबह से बर्तन लेकर कतार में खड़े देखे जा सकते हैं। इसी क्रम में पानी के लिए लोगों के बीच रोज नोंक-झोंक होना आम बात हो गयी है। लोगों के पास सप्लाई पानी के अलावा कोई विकल्प नहीं है। अगर किसी दिन पानी नहीं आता है तो लोग उस दिन पानी की एक बुंद के लिए भी तरस जाते हैं। उनकी दिनचर्या बाधित हो जाती है।

 

आधी रात के बाद बर्तन लेकर पानी का इंतजार करते हैं लोग

पानी भरने के लिए लोग अपनी नींद और चैन कुर्बान कर अहले सुबह से ही कतार में जाते हैं। बच्चे, बूढ़े, जवान, महिलायें सभी गैलन, बाल्टी, डेगची लेकर राधी रात के बाद से ही पानी के लिये भटकते देखे जा सकते हैं। लोगों का कहना है कि पेयजलापूर्ति योजना के शुरू होने से काफी हद तक पेयजल की समस्या का निदान होने की उम्मीद जगी थी, परंतु पाइपलाइन के अभाव के कारण पानी मिलना मुश्किल हो गया है। कई वार्डो में पाइप लाइन नहीं होने से लोगों के समक्ष पेयजल की भीषण समस्या उत्पन्न हो गई है।




सप्ताह में सिर्फ एक-दो दिन ही होती है जलापूर्ति

बता दें कि चास पेयजलापूर्ति योजना से पिछले डेढ़ साल से चास के विभिन्न क्षेत्रों में जलापूर्ति की जा रही है, पर जलापूर्ति प्रतिदिन नहीं हो पाती। सप्ताह में एक-दो दिन पानी की आपूर्ति होती है। इस कारण लोगों को पानी के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी विस्थापित क्षेत्रों में है। चापाकल व डीप बोरिंग का जलस्तर अभी से ही नीचे चला गया है। बोरिंग भी रुक-रुककर पानी दे रहा है। कई मुहल्ले के लोग दूसरी जगह से पीने का पानी साइकिल व ठेला से लाने को विवश हैं। चास के भवानीपुर साइट, कुशलबांधा, कृष्णापुरी नगर, पटेल नगर, बाउरी मुहल्ला आदि क्षेत्रों में पेयजल की समस्या काफी गंभीर है। आलम यह है कि लोगों को प्यास बुझाने के लिए कई किमी दूर से पानी लाना पड़ रहा है। मामले पर अबतक न तो चास नगर निगम गंभीर है और न ही जिला प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया है। गर्मी के शुरूआती दिनों में चास में अधिकांश इलाकों का पानी करीब 200 फुट नीचे चला गया है, जिसके बाद से ही पेयजलसंकट बरकरार है।

 





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