खूंटी : समेकित विकास केंद्र सह पुलिस पिकेट स्थापित किए जाने का काम युद्धस्तर पर जारी

Police Pickett Integrated Development Centerखूंटी : जिले के कोचांग एवं कुरूंगा और पश्चिमी सिंहभूम जिला के शारदा गांव में पुलिस विभाग द्वारा खोले गए समेकित विकास केंद्र सह पुलिस पिकेट स्थापित किए जाने का काम युद्धस्तर पर जारी है. एसपी अश्विनी कुमार सिन्हा समेत जिले के तमाम पुलिस अधिकारी रविवार से ही कोचांग में कैंप कर पुलिस पिकेट स्थापित कराने में सहयोग के साथ दिशा-निर्देश दे रहे हैं. पिकेट में बोरिंग से लेकर हर वह कार्य किए जा रहे हैं जो सुरक्षा के साथ बुनियादी तौर पर जरूरी हैं. कैंप परिसर की समतलीकरण, घेराबंदी,शौचालय का निर्माण,बिजली की वायरिंग रहने के लिए तंबू लगाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य होना है. इस पर कार्य भी शुरू कर दिया गया है. एसपी खुद पिकेट में कैंप कर हर कार्य में नजर रखे हुए हैं. पुलिस पिकेट स्थापित किए जाने के क्रम में सुरक्षा को ध्यान में रख चार सौ से अधिक पुलिस बलों की तैनाती की गई है.

पुलिस कैंप से खुश हैं लोग

बंदगांव से कोचांग व कोचांग से बीरबांकी तक भारी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई है और जवान लगातार पैनी नजर रखे हुए हैं. इसके अलावा पुलिस पिकेट के आसपास चारों ओर पुलिस बल तैनात है. जैसे ही पिकेट को ऑपरेशनल मॉड में आती है, पुलिस के जवान नक्सलियों व पत्थलगड़ी के नेताओं के खिलाफ इलाके में अभियान छेड़ देगी. इलाके में रहने वाले अधिकांश लोग पुलिस पिकेट खुलने एवं पहली बार पुलिसिया धमक से खुश हैं. कैम्प के लिए हर छोटी-छोटी चीजों को ध्यान में रख कार्य किए जा रहे हैं. इन इलाकों में पुलिस पिकेट खुलने से नक्सल अभियान में तेजी लाने के साथ ही विकास से ग्रामीणों को जोड़ने में कारगर साबित होगा.




अड़की प्रखंड क्षेत्र में पत्थलगड़ी के कारण प्रतिबंधित संगठन पीएलएफआई और भाकपा माओवादियों ने अपनी दबिश बढ़ा दिया था जिसके कारण नक्सलवाद जिले में धीरे-धीरे अपना पांव पसार रहा था लेकिन पुलिस ने इसे चुनौती के रूप में लिया और अड़की इलाके में पुलिस कैम्प स्थापित किया. पुलिस कैम्प के खुलने से क्षेत्र का विकास और पत्थलगड़ी से जुड़े नेता, गैंगरेप में शामिल अपराधियों के साथ-साथ नक्सलियों के खिलाफ अभियान में तेज़ी आयेगी.

पुलिस की  पहल से क्षेत्र का विकास संभव

खूंटी,सरायकेला और चाईबासा जिले के सीमांत पर बसे गांव में मौजूद पत्थलगड़ी के शीर्ष नेता और नक्सली संगठन के कई बड़े हार्डकोर नक्सली दस्ते की मौजूदगी के कारण क्षेत्र में पुलिस को उनके खिलाफ अभियान चलाना एक बड़ी चुनौती थी. कई बार पुलिस का प्रयास भी हुआ लेकिन ग्रामीणों का विरोध और ग्रामीणों की आड़ में नक्सली अपने मंसूबे पर कामयाब होते रहे जिसके कारण क्षेत्र का विकास आज तक नहीं हो सका. लेकिन अब झारखण्ड सरकार और पुलिस की पहल के बाद क्षेत्र का विकास होना संभव है और उम्मीद है इलाके से खौफ का खात्मा होगा.





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