हजारीबाग बुराड़ी कांड : जिसके नाम है महेश्वरी परिवार की पावर ऑफ अटॉर्नी, वह खुद चाहता है CBI जांच

6 people suicide case is murderफलक शमीम

​हजारीबाग : 14 जुलाई को हजारीबाग में एक ही परिवार के छह लोगों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया था. आखिर किन कारणों से यह मौतें हुई, यह हत्या है या आत्महत्या, हर कोई यह जानना चाहता है. खजांची तालाब के फ्लैट नंबर 302 में रहने वाले एक ही परिवार के छह सदस्य 14 जुलाई की रात रहस्यमय तरीके से मृत पाए गए थे. जिनमें से 5 लोगों की निर्मम हत्या हुई थी और एक व्यक्ति ने छत से कूदकर अपनी जान दी थी. प्रथम दृष्टया में सारा मामला आत्महत्या और हत्या के बीच का लग रहा था. बंद लिफाफे में एक पावर ऑफ अटॉर्नी भी मिली थी, जिसमें उमेश साव को फ्लैट देने की बात लिखी है. बता दें कि उमेश साव का फ्लैट भी उसी अपार्टमेंट में हैं जिसका नंबर 203 है. यह फ्लैट माहेश्वरी परिवार के फ्लैट से ठीक एक माले नीचे है. इस पॉवर ऑफ अटॉर्नी के मिलने के बाद और उसमें आये उमेश साव के नाम के कारण माहेश्वरी परिवार के परिजन उमेश साव पर भी शक कर रहे हैं. पावर ऑफ अटॉर्नी के रहस्य को लेकर परिवार वालों ने भी सवाल खड़े किये हैं. परिजनों का कहना है कि अगर कर्ज की रकम लौटनी थी तो पावर ऑफ अटॉर्नी परिजनों के नाम पर करनी चाहिए थी. बाहर के शख्स के नाम पर क्यों किया गया. इस बात को लेकर परिजनों ने जिला प्रशासन का भी ध्यान आकृष्ठ कराया है.

दम घुटने से हुई थी मौत

मामले को लेकर पुलिस ने बताया कि हर बिंदु पर जांच हो रही है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया है कि महेश्वरी परिवार के सभी सदस्यों की मौत फांसी लगने की वजह से दम घुटने से हुई है. पुलिस जांच कर रही है. जल्द ही मौत की गुत्थी सुलझा ली जाएगी.




एक स्थान पर रहते हुए हो गई थी दोस्ती

वहीं जिनके नाम महेश्वरी परिवार ने पावर ऑफ अटॉर्नी किया है उनका फ्लैट मृतक के फ्लैट के ठीक नीचे है. पुलिस ने फ्लैट के मालिक उमेश साव से पूछताछ भी की है. अब खुद उमेश इस पूरे मामले की सीबीआई जांच चाहते हैं. अपने दिए बयान में उन्होंने कहा कि नरेश महेश्वरी से उसके कोई व्यावसायिक संबंध नहीं थे. लेकिन बहुत दिनों से स्थान पर रहने के कारण दोनों परिवारों के बीच घनिष्टता थी. सुख-दुख में वे दोनों एक दूसरे के काम आते थे. खुद भी नहीं सोच सकते उनका मित्र ऐसा कदम उठा सकता है. उन्होंने कहा कि अगर यह हत्या है तो इसकी भी जांच होनी चाहिए और यदि आत्महत्या का मामला है, तो भी जांच हो. अगर स्थानीय पुलिस यह जांच कर पाती है तो भी अच्छी बात है, नहीं तो सीबीआई जांच होनी चाहिए.

हजारीबाग में बड़ा समूह इस पूरे कांड को मान रहा हत्या

वहीं हजारीबाग में बड़ा समूह इस पूरे कांड को हत्या मान रहा है और इसकी पूरी जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहा है. लोग न्याय के लिए कैंडल मार्च और मौन जुलूस निकाल रहे हैं. पुलिस भी तहकिकात कर रही है, लेकिन अभी तक कुछ ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाई है. यह केवल तंगहाली से सुसाइड का मामला है या फिर सुनियोजित तरीके से हत्या.





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