निजी ब्लड बैंकों को लगाना होगा रक्तदान शिविर, नहीं तो रद्द होगा लाइसेंस

निजी ब्लड बैंकोंरांची : निजी अस्पताल खुद लगाएं ब्लड डोनेशन कैंप, नहीं तो रद्द होगा लाइसेंस, नर्सिंग होम और प्राइवेट अस्पतालों को सिविल सर्जन ने दी चेतावनी, जिले के निजी नर्सिंग होम या प्राइवेट अस्पतालों को अब अपने मरीजों के लिए खून की व्यवस्था खुद करनी पड़ेगी.

राज्य के निजी नर्सिंग होम हो या प्राइवेट अस्पतालों को अब अपने मरीजों के लिए खून की व्यवस्था खुद करनी है. इसके लिए उन्हें अब नियमित कैंप लगाने होंगे. अगर ऐसा नहीं किया तो अस्पताल के खिलाफ झारखंड क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के अनुसार कार्रवाई होगी. अस्पताल का लाइसेंस भी रद्द हो सकता है. इस विषय में सिविल सर्जन रांची डॉक्टर विजय बिहारी प्रसाद ने कहा कि प्रशासन कार्रवाई करने की तैयारी पूरी कर चुकी है और जल्द ही आदेश निकाला जाएगा.




निजी अस्पतालों की मनमानी के कारण सदर अस्पताल और रिम्स के ब्लड बैंक पर लोड अधिक है. ऐसे में आए दिन खून की समस्या की बातें सामने आती रही है. निजी अस्पतालों में भर्ती मरीज भी सरकारी ब्लड बैंकों के चक्कर लगाते हैं. जिस कारण खून की कमी अक्सर बनी रहती है. रांची में प्रतिदिन डेढ़ सौ यूनिट खून की खपत है, लेकिन इसके अनुरूप ब्लड डोनेशन कैंप नहीं हो रहा है.

जाहिर है खून कि कमी की बातें अक्सर सामने आती रही है. ऐसे में यह फैसला प्राइवेट अस्पतालों के लिए एक चेतावनी है. प्राइवेट अस्पताल भी ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन करें, ताकि खून की हो रही कमी की भरपाई पूरी हो और मरीजों को समस्याओं का सामना ना करना पड़े.

  • रांची में रोज 150 यूनिट खून की खपत
  • रिम्स में प्रतिदिन 80-100 यूनिट खून की खपत
  • औसतन 35-40 यूनिट ब्लड का ही होता है रिप्लेसमेंट
  • प्राइवेट अस्पतालों के मरीजों को लगाने पड़ते हैं रिम्स और सदर अस्पताल ब्लड बैंक के चक्कर

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